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निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप:परिजन बोले- गलत इलाज से नवजात की मौत; प्रसूता की दोनों किडनियां खराब, एसपी ऑफिस में शिकायत




मंदसौर के एक निजी अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप का मामला सामने आया है। ग्राम सोनगरा निवासी एक परिवार ने बुधवार को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर डॉ. कपिल शर्मा और शांतिराज हॉस्पिटल के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। परिवार का आरोप है कि इलाज में लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई और प्रसूता की दोनों किडनियां प्रभावित हो गईं। महिला का इलाज फिलहाल अहमदाबाद के IKDRC अस्पताल में चल रहा है। परिजनों ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप
पीड़ित सुनील प्रजापति ने बताया कि उनकी 24 वर्षीय पत्नी अंजना का गर्भावस्था के दौरान डॉ. कपिल शर्मा से इलाज चल रहा था। उनका कहना है कि 2 जुलाई को सोनोग्राफी के बाद डॉक्टर ने मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सामान्य बताया था। उसी रात तबीयत बिगड़ने पर अगले दिन ऑपरेशन की सलाह देकर शांतिराज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि 4 जुलाई को ऑपरेशन से पहले अंजना की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें घबराहट, बेचैनी और उल्टी हो रही थी, लेकिन समय पर गंभीरता से जांच नहीं की गई। परिवार का दावा है कि दोपहर तक डॉक्टर ने मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित बताया, लेकिन सी-सेक्शन के बाद नवजात की मौत की जानकारी दी गई। समय पर रेफर नहीं करने का भी आरोप
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत लगातार गंभीर बनी रही। उनका ब्लड प्रेशर करीब 170 तक पहुंच गया था और पेशाब भी नहीं आ रहा था। इसके बावजूद उन्हें तत्काल किसी बड़े अस्पताल रेफर नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि बार-बार आग्रह करने के बाद महिला को इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल भेजा गया। परिवार का दावा है कि वहां चिकित्सकों ने बताया कि महिला की दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी थीं। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें अहमदाबाद के IKDRC अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डिस्चार्ज रिकॉर्ड में हेराफेरी की
परिजनों ने अस्पताल के डिस्चार्ज सारांश और अन्य दस्तावेजों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डिस्चार्ज रिकॉर्ड में ब्लड ग्रुप तक गलत दर्ज है। साथ ही उपचार संबंधी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है। परिवार का कहना है कि 2 जुलाई को महिला का हीमोग्लोबिन 9.9 ग्राम प्रति डेसीलीटर था, जो 4 जुलाई तक घटकर 6.3 ग्राम रह गया। वहीं प्लेटलेट्स में भी बड़ी गिरावट आई। जबकि ऑपरेशन नोट्स में केवल 800 एमएल रक्तस्राव दर्ज किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति से जांच कराने की मांग की है। परिजनों ने ऑपरेशन में शामिल डॉक्टरों, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और मेडिकल स्टाफ की भूमिका की जांच कराने, समय पर रेफर नहीं करने के कारणों की पड़ताल करने और उपचार से जुड़े सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने पर संबंधित चिकित्सक और अस्पताल के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। डिप्टी कलेक्टर बोले- कार्रवाई करेंगे डिप्टी कलेक्टर राहुल ने कहा कि पीड़िता के परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को लेकर ज्ञापन दिया है। इसे उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर बोला- मेरा काम इलाज करना है बयान देना नहीं इस मामले में डॉ. कपिल शर्मा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा, “मैं बाइट देता ही नहीं हूं। मैं इतना एक्सपर्ट नहीं हूं। मेरा काम इलाज करना है।” कैमरे पर अपनी बात रखने के आग्रह पर भी उन्होंने यही कहा कि वह चिकित्सक हैं और इस विषय पर बयान नहीं देंगे।



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