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हिमाचली सेब को देश के कोने-कोने में पहुंचाएगा रेलवे:शिमला में आज बनेगा ढुलाई का रोडमैप; इंडियन रेलवे के साथ मार्केटिंग बोर्ड की अहम बैठक




हिमाचल प्रदेश का सेब पहली बार रेल के जरिए देश की मंडियों में पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए इंडियन रेलवे ने खुद हिमाचल सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इस पर अमल के लिए आज (गुरुवार को) शिमला में राज्य सरकार, इंडियन रेलवे और हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बीच अहम बैठक होने जा रही है। इसमे रेलवे और सरकार के अधिकारियों के अलावा सेब उत्पादक बागवान, आढ़ती, किसान संगठन भी शामिल होंगे। इस दौरान रेल से सेब की ढुलाई का पूरा रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसमें यह तय होगा कि किन रेलवे स्टेशनों से सेब देश की मंडियों को भेजा जाएगा। सेब ढुलाई का भाड़ा कितना होगा, पैकिंग और लोडिंग की व्यवस्था कैसी रहेगी और किसानों को यह सुविधा किस तरह उपलब्ध कराई जाएगी। इन सब मुद्दों पर आज चर्चा होगी। अभी तीन स्टेशन से ढुलाई की योजना प्रारंभिक योजना के अनुसार- हिमाचल के सेब को कालका, चंडीगढ़ और अंबाला से मालगाड़ियों के जरिए देश के प्रमुख बाजारों तक भेजने की योजना है। इस पर अंतिम निर्णय आज हो सकता है। रेलवे का मानना है कि यह व्यवस्था सेब को देश के कोने-कोने तक तेज, सुरक्षित और कम लागत में पहुंचाने में मदद करेगी। अभी ट्रकों के जरिए पूरे देश में भेजा जाता है सेब अभी तक हिमाचल का पूरा सेब ट्रकों के जरिए ही देश की विभिन्न फल मंडियों में भेजा जाता है। हर साल सीजन के दौरान देशभर से हजारों ट्रक सेब ढुलाई के लिए हिमाचल पहुंचते हैं। ट्रकों में परिवहन लागत बढ़ जाती है और कई बार जाम, बारिश या सड़क बंद होने जैसी समस्याओं के कारण सेब समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाता। समय और किराए में बचत होगी देरी होने पर फल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। यही नहीं मैदानी इलाकों में भारी बारिश की सूरत में सेब से लदे ट्रक कई कई दिन तक जगह जगह खड़े रहते हैं। इससे सेब गाड़ियों में सड़ जाता है और बागवानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में रेलवे के जरिए सेब परिवहन होने से समय की भी बचत होगी और किराया भी कम देना पड़ेगा। बारिश के दौरान ट्रकों में सेब सड़ने का डर खत्म होगा बागवान संगठनों का मानना है कि यदि रेल में किराया कम लगेगा तो उन्हें निश्चित तौर पर फायदा होगा। मानसून के दौरान ट्रकों में सेब सड़ने का डर भी खत्म होगा और कम समय में चैन्नई, मुंबई, मद्रास कोलकाता इत्यादि मंडियों तक सेब पहुंच सकेगा। हिमाचल में सेब आर्थिकी 5500 करोड़ रुपए से ज्यादा की है। अभी तक शत-प्रतिशत सेब ट्रकों के जरिए मंडियों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में यदि इंडियन रेलवे के साथ सरकार की मीटिंग में सहमति बनी तो सेब ढुलाई की व्यवस्था में पहली बार बड़ा बदलाव आएगा।



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