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बेगूसराय में टूटे पैर में बांध दिया कार्टून; VIDEO:सड़क हादसे में घायल हुआ था एडमिट, अस्पताल प्रभारी बोले- मेडिकल साइंस से सही है




बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टून का टुकड़ा बांध दिया गया। अस्पताल के बेड पर कूट के गत्ते से बंधे पैर के साथ तड़पते मरीज का वीडियो सामने आया है। इस संबंध में जब अस्पताल के प्रभारी से बातचीत की गई तो उन्होंने इसे मेडिकल साइंस के हिसाब से सही बताया। घटना 3 अगस्त की शाम की बताई जा रही है। नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवाड़ा गांव का रहने वाला कुणाल कुमार अपनी बाइक से जा रहा था। इसी दौरान हरसाइन पुल के पास उसकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से गंभीर रूप से घायल कुणाल को तत्काल मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया। मंझौल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने मरीज के पैर को सहारा देने के लिए दो तरफ से दवा का गत्ता (कूट का कार्टून) लगाया और उसे रस्सी व बैंडेज से कसकर बांध दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के नाम पर सीधे सदर अस्पताल बेगूसराय के लिए रेफर कर दिया। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि मरीज बेड पर पड़ा है और उसके पूरे पैर में एबॉट कंपनी के गत्ते का कार्टून बंधा हुआ है। अस्पताल में घायल के पैर में कार्टून बांधने की 2 तस्वीरें अस्पताल प्रशासन का तर्क- मेडिकल साइंस में गत्ता बांधना गलत नहीं मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अस्पताल की कमियों को स्वीकार करते हुए इसके पीछे मेडिकल साइंस और मजबूरी का तर्क दिया। उन्होंने कहा कि आप लोग जिसे कूट या गत्ता बोल रहे हैं, मेडिकल साइंस में उसे स्प्लिंट कहा जाता है। जब हड्डी टूटती है, तो अंदरूनी नुकसान को रोकने के लिए उस हिस्से को स्थिर करना जरूरी होता है। उस समय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर उपलब्ध नहीं थे। प्लास्टर की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में मरीज को दर्द से राहत देने और हायर सेंटर भेजते समय पैर को हिलने-डुलने से बचाने के लिए उपलब्ध सामग्री से स्प्लिंट बांधना मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत जायज है। उन्होंने यह भी माना कि अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है, जिसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। सिविल सर्जन बोले- मामले की जांच कराई जाएगी सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह जानकारी मिली है। वीडियो वायरल हुआ है, इसकी वह जांच कराएंगे और जांच कर अगर दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिकी उपचार के तौर पर कार्टून बांधकर भेजा गया था। मेडिकल साइंस में जान बचाने के लिए ऐसा किया जाता है। लेकिन अस्पताल में अगर ऐसा किया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। करोड़ों के अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की वास्तविक स्थिति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, वहां एक साधारण फ्रैक्चर के इलाज और प्लास्टर की सुविधा तक क्यों नहीं है। करोड़ों की इमारतें सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गई है। पैर फैक्चर करने का भी इलाज की व्यवस्था क्यों नहीं है। इमरजेंसी में ऑर्थो डॉक्टर और ड्रेसर की तैनाती क्यों नहीं रहती।



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