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CM विजय की पत्नी ने तलाक की अर्जी वापस ली:बेवफाई का आरोप लगाकर फरवरी में केस किया था, श्रीलंका मूल की हैं संगीता




तमिलनाडु के CM सी जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने उनके खिलाफ दायर तलाक की अर्जी वापस ले ली है। इसके साथ ही चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में में मामला खत्म हो गया है। संगीता ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुई। उन्होंने जज सुजाता को अपनी अर्जी वापस लेने की जानकारी दी। जज ने करीब 15 मिनट तक उनसे पूछताछ की और फिर अर्जी स्वीकार करते हुए तलाक का मामला बंद कर दिया। फरवरी 2026 में दायर की थी अर्जी संगीता ने फरवरी 2026 में यह तलाक की अर्जी दायर की थी। अपनी याचिका में उन्होंने विजय पर बेवफाई का आरोप लगाया था। संगीता ने दावा किया था कि विजय का एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस रिश्ते के बारे में अप्रैल 2021 में पता चला, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा हुई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि विजय का उस अभिनेत्री के साथ संबंध जारी रहने से उन्हें भावनात्मक कष्ट हुआ और बच्चों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी। संगीता ने दावा किया कि 2021 से विजय उनसे भावनात्मक रूप से दूर हो गए थे और उन्हें मौखिक रूप अपमान झेलना पड़ा। साथ ही विजय पति की जिम्मेदारियों से भी पीछे हट गए। 1999 में हुई थी शादी विजय और संगीता की पहली मुलाकात 1996 में हुई थी। संगीता मूल रूप से श्रीलंकाई हैं और उनकी परवरिश ब्रिटेन में हुई थी। दंपती ने 1998 में यूके में अपनी शादी का पंजीकरण कराया था। इसके बाद 25 अगस्त 1999 को चेन्नई में हिंदू रीति-रिवाजों से उनका विवाह हुआ था। उनके दो बच्चे बेटा जेसन और बेटी दिव्या हैं। चुनाव के दौरान चर्चा में रहा था मामला इस मामले की कानूनी कार्यवाही 26 फरवरी को शुरू हुई थी। बाद में इसे 20 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया था, जो तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से तीन दिन पहले का समय था। चुनाव प्रचार के दौरान यह तलाक का मामला काफी चर्चा में रहा था। मद्रास हाईकोर्ट में भी उठी थी जांच की मांग यह घटनाक्रम मद्रास हाईकोर्ट में विजय के चुनावी हलफनामे की जांच की मांग वाली याचिका के बीच हुआ है। विजय ने हलफनामे में बताया था कि उन्होंने संगीता को 12.60 करोड़ रुपए उधार दिए थे। पेरंबूर निर्वाचन क्षेत्र के वोटर वेंकटेश ने इस घोषणा पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ता ने एक निजी शैक्षणिक ट्रस्ट को दिए गए 20 करोड़ रुपए के खुलासे पर भी सवाल खड़े किए थे। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने अप्रैल के अंत में इस याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इसी तरह की राहत मांगने वाली एक याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है।



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