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बिलासपुर में फुटपाथ पर बनाया सड़क, अवैध-कब्जा भी:हाईकोर्ट बोला-पैदल चलना लोगों का मौलिक-अधिकार, निगम कमिश्नर से पूछा-फुटपाथ बचाने क्या किया




बिलासपुर में सड़क निर्माण में फुटपाथ को गायब कर दिया गया है तो कई जगह अवैध कब्जा, अनियंत्रित पार्किंग बना दी गई है, जिससे पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर खतरा है। इसे लेकर दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने निगम आयुक्त से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि फुटपाथ बचाने के लिए क्या प्रयास किए गए इस पर शपथपत्र के साथ जवाब दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। इस मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। ऐसे में नगर निगम का यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह फुटपाथों का संरक्षण करे और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त रखे। डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के लिए अब तक धरातल पर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। आरटीआई और शिकायतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि सार्वजनिक फुटपाथों पर अवैध कब्जों और ट्रैफिक पुलिस के लचर रवैये से बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन को बार-बार शिकायतें देने व आरटीआई लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सड़क निर्माण के दौरान गायब कर दिया फुटपाथ
याचिका में आरोप लगाया गया है नेहरू नगर से लेकर दर्रीघाट तक सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें नेहरू चौक से गोलबाजार होते हुए जूना बिलासपुर, दयालबंद और उससे आगे तक निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जिसमें निर्माण एजेंसी ने फुटपाथ को सड़क में मिलाकर गायब कर दिया है। इससे अब पैदल चलने के लिए जगह उपलब्ध नहीं है। प्रशासन के दावों की खुली पोल
सुनवाई के दौरान नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने बताया कि अतिक्रमण हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण और सड़क सुरक्षा अभियानों के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस ने दलील दी कि वर्ष 2024 में नियमों के उल्लंघन पर 67 हजार से ज्यादा चालान काटे गए। फोटोग्राफ से कोर्ट में बेनकाब हुए दावे
याचिकाकर्ता ने अदालत में हाल ही के फोटोग्राफ और मीडिया रिपोर्ट्स पेश कर प्रशासन के दावों को झूठा करार दिया। याचिका में कहा गया कि कागजी कार्रवाइयों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस है। फुटपाथों पर आज भी दुकानों का कब्जा और गाड़ियां खड़ी हैं, जबकि शहर में पार्किंग प्रबंधन की कोई दीर्घकालिक नीति ही मौजूद नहीं है।



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