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बलौदाबाजार जिले के करही बाजार चौकी क्षेत्र के ग्राम लालपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्मशान घाट का पारंपरिक रास्ता कथित अतिक्रमण की चपेट में होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव खेतों के बीच से ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानकारी के अनुसार, ग्राम लालपुर निवासी बृहस्पति यादव का प्रसव के लगभग 12 दिन बाद गुरुवार को निधन हो गया। परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर श्मशान घाट की ओर निकले, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खेत और दलदल पार कर शव ले गए ग्रामीण मजबूरी में ग्रामीणों ने करीब एक किलोमीटर तक खेतों के रास्ते शव को कंधों पर उठाकर नदी किनारे स्थित श्मशान घाट तक पहुंचाया। इस दौरान उन्हें दलदल और फसल के बीच से गुजरना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते पर लंबे समय से अतिक्रमण है। इस संबंध में प्रशासन को कई बार शिकायतें और आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। यही कारण है कि गांव में हर बार किसी की मृत्यु होने पर अंतिम यात्रा खेतों के बीच से ही निकालनी पड़ती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने और स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ा और परेशानी का सामना न करना पड़े।
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रास्ता नहीं मिला तो खेतों के बीच से निकली अंतिम-यात्रा,VIDEO:बलौदाबाजार में श्मशान के रास्ते पर अतिक्रमण, शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
