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डॉक्टर की पत्नी के गर्भ में बच्चे की मौत:​महिला एम्स के आईसीयू में एडमिट; प्रशासन ने बनाई जांच कमेटी




एक गर्भवती महिला के गर्भ में ही बच्चे की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। मामला जोधपुर के मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल का है। पीड़ित महिला के पति डॉ. सुमित गहलोत इसी अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में कार्यरत हैं। इस मामले को लेकर अस्पताल के अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) डॉ. विकास राजपुरोहित ने शनिवार को एक जांच कमेटी गठित की है, जो सोमवार तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी। जानकारी के अनुसार महिला 8 महीने की गर्भवती थी। 4 अगस्त की सुबह करीब 3 बजे अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे एमडीएम अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। उस समय महिला को हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) और गंभीर संक्रमण (इंफेक्शन) था। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी डॉक्टर को बुलाने के लिए कई बार कॉल किए, लेकिन सुबह तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। इधर, शनिवार को शहर के एक प्राइवेट क्लिनिक में ढाई साल के बच्चे की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया। आरोप था कि गलत इंजेक्शन से मौत हुई है। जबकि डॉक्टर का कहना है कि बच्चे का सोडियम और ऑक्सीजन लेवल कम था। और, तीन दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। एम्स पहुंचने पर मृत घोषित किया बच्चा अस्पताल में कोई सुनवाई न होने पर परिजन सुबह महिला को लेकर एम्स (AIIMS) पहुंचे। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और वह एम्स के आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं। अधीक्षक ने बैठाई जांच कमेटी एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि महिला 8 महीने की गर्भवती थीं और उनका बीपी काफी बढ़ा हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी जांच करेगी कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और क्या समय पर महिला को इलाज दिया गया था या नहीं। सोमवार तक सभी के बयान दर्ज कर रिपोर्ट फाइनल कर दी जाएगी। इधर, ढाई साल के मासूम की मौत पर क्लिनिक में हंगामा, परिजनों ने लगाया गलत इंजेक्शन का आरोप जोधपुर के मानजी का हत्था इलाके में ढाई साल के एक बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने राज धारीवाल क्लिनिक पर जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना था- डॉक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने के कारण बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। वहीं इस मामले में डॉक्टर राज धारीवाल का कहना है कि जब बच्चे को लेकर आए तब उसका ऑक्सीजन लेवल कम था। और, तीन दिन से उसे उल्टी-दस्त हो रहे थे। तीन दिन से परिजन गांव में ही एक डॉक्टर को दिखा रहे थे। मैंने तो उनकी मदद की थी और अब मुझ पर ही आरोप लगा रहे है। मृतक बच्चे की पहचान जियांश के रूप में हुई है, जो बावड़ी में अपने नाना के पास रहता था। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उम्मेद अस्पताल लेकर गए थे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हंगामे की सूचना पर महामंदिर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश कर मामला शांत कराया। शव को महात्मा गांधी अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। डॉक्टर बोले- तीन दिन से बिगड़ी थी तबीयत, ऑक्सीजन भी कम था वहीं डॉक्टर राज धारीवाल ने कहा- बच्चे को पिछले तीन दिनों से गंभीर उल्टी-दस्त (डायरिया) की शिकायत थी। जब दो महिलाएं सुबह उसे लेकर क्लिनिक आईं, तो बच्चे का ऑक्सीजन लेवल केवल 68% था और उसका सोडियम भी काफी कम हो चुका था। वे सुबह 7 बजे से ही क्लिनिक के बाहर बैठी थीं, जबकि उन्हें पता था कि मैं सुबह 10:30 बजे आता हूं। मैंने आते ही तुरंत इलाज शुरू किया और उसका ऑक्सीजन लेवल 85% तक लेकर आया। इसके बाद मैंने खुद उम्मेद अस्पताल में फोन कर डॉक्टर को केस की जानकारी दी और अपने पास से टैक्सी करवाकर परिवार को वहां भेजा। इतना सब करने के बाद भी मुझ पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड से होगा पोस्टमॉर्टम महामंदिर थानाधिकारी (CI) देवेंद्र सिंह देवड़ा ने बताया कि प्राथमिक जांच में बच्चे का सोडियम लेवल काफी कम होने की बात सामने आई है। परिजनों के आरोपों को देखते हुए रविवार सुबह मेडिकल बोर्ड से बच्चे के शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। इसकी रिपोर्ट आगे मेडिकल कॉलेज को भेजी जाएगी।



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