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शिक्षिका के अपना कारोबार शुरू करने की प्रेरक कहानी:सोशल मीडिया पर मांगी मदद, 40 लोगों ने फूल उगाने को फ्री में दी जगह




सोचिए, आप सोशल मीडिया पर लिखें कि ‘मुझे फूलों की खेती करने के लिए आपके टैरेस गार्डन या यार्ड की खाली जमीन चाहिए। जवाब में 40 लोग आगे आएं और कह दें, ‘हमारा टैरेस गार्डन या यार्ड ले लीजिए, वो भी मुफ्त में।’ अमेरिका के मेम्फिस शहर में पेशे से शिक्षिका मारिसा मेंडर फ्रैंकलिन के साथ ऐसा ही हुआ। 2021 में उन्होंने लोकल ‘बाय नथिंग’ फेसबुक ग्रुप में पोस्ट डाली। मकसद था फूलों का सब्सक्रिप्शन शुरू करना। उनके पास अपनी जमीन नहीं थी। एक हफ्ते में 40 प्रस्ताव आए। मार्च 2021 में बुवाई का सीजन शुरू होने से पहले उन्होंने 5 यार्ड चुने। वहीं फूल लगाए। तब भी वे शिक्षिका थीं। 16 महीने बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। आज उनका मिडटाउन ब्रैम्बल एंड ब्लूम नाम से फूलों का अच्छा कारोबार चल रहा है। वह अब 10 यार्ड में फूलों की खेती कर रही हैं, वो भी जमीन का किराया दिए बिना। उनके इस काम में 7 लोगों को काम मिला है। वे हर हफ्ते किसान बाजार में फूलों को बेचते हैं। इवेंट करते हैं। स्टोरफ्रंट भी चलाते हैं। तेरा तुझको अर्पण: सीड लाइब्रेरी, गार्डनिंग भी सिखा रहीं मारिसा का दावा है कि उन्होंने ‘सीड लाइब्रेरी’ बनाई है, जहां से लोग बीज ले सकते हैं। लोगों को फूलों की खेती भी सिखाती हैं- जैसे परागण करने वाले पौधे कैसे उगाएं? सब्जियों का गार्डन कैसे बनाएं? वे हर महीने धन जुटाती हैं। इस साल अब तक हजारों डॉलर दान कर चुकी हैं। उनका कहना है, ‘मकसद अमीर बनना नहीं है, बल्कि समुदाय से मिला भरोसा, समुदाय को लौटाना है। इससे नए लोगों से जुड़ाव भी बना। भरोसे से बना फूलों की खेती का अनूठा मॉडल मारिसा बताती हैं कि शुरुआत में उन्होंने अपनी जरूरतें बताई थी। उन्हें ऐसी जगह चाहिए थी, जहां पर्याप्त धूप हो। सिंचाई के लिए पानी और जमीन का इस्तेमाल करने की आजादी हो। बदले में वे देखभाल करेंगी। कभी-कभी गुलदस्ते देंगी। परागण करने वाले कीटों की पसंद वाले पौधे लगाएंगी। मारिसा बताती हैं कि जिस ग्रुप में उन्होंने पोस्ट लिखी थी, उसमें लोग चीजें मांगते थे। पहले देखा था कि एक पैरेंट ने फ्रेंच हॉर्न (वाद्य यंत्र) मांगा तो कई लोगों ने देने की पेशकश की थी। इससे उनका हौसला बढ़ा। मारिसा के अनुसार, उन्होंने शुरू में 40 में से 5 प्लॉट चुने। योजना बनाई। पौधे लगाए। यह काम उन्होंने अध्यापन के साथ किया। दिन में स्कूल। बाकी समय फूलों खेती। वे इसे ‘सोशल एंटरप्राइज’ बनाना चाहती थीं। कामयाब हुईं और 16 महीने बाद शिक्षिका की नौकरी छोड़कर पूरी तरह से फूलों की खेती में जुट गईं।



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