पुलिस की जांच से भी तेज साइबर ठगों की रफ्तार:अब महू केंटोनमेंट बोर्ड का फर्जी पर्चेस ऑर्डर भेजकर उद्योगपतियों को बना रहे निशाना




ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले गिरोह की रफ्तार पुलिस की जांच से भी तेज हो चुकी है। पुलिस जब तक इनके किसी एक तरीके को डिकोड करती है, ये ठगी का नया तरीका लेकर आ जाते हैं। ताजा मामले में शातिरों ने महू आर्मी केंटोनमेंट बोर्ड के नाम पर इंदौर और आसपास के उद्योगपतियों को टारगेट करना शुरू किया है। हाल ही में एक महिला उद्योगपति ने सूझबूझ से खुद को बचा लिया, लेकिन केंट बोर्ड के गार्ड्स के मुताबिक केंट बोर्ड के नाम पर रोज 4 से 5 लोग ऐसे ही माल लेकर आ रहे हैं और ठगी का शिकार हो रहे हैं। भमोरी क्षेत्र की कारोबारी पिंकी श्रीवास्तव ने बताया एक महीने पहले उन्हें वाट्सएप पर महू केंट बोर्ड के नाम से 2 लाख 15 हजार 230 रुपए का एक पर्चेस ऑर्डर मिला। केंट बोर्ड का हूबहू दिखने वाला ऑफिशियल लेटरहेड होने के कारण उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। वाट्सएप पर केंट बोर्ड का अफसर बनकर बात कर रहे ठग ने उनसे सिलीकॉन (पीएस) प्रोडक्ट की मांग की। 5 रुपए के ट्रांजेक्शन से खुल गई पोल
पिंकी ने दिल्ली से स्पेशल माल मंगवाया और खुद लोडिंग वाहन लेकर महू केंट बोर्ड पहुंचीं। वहां पहुंचते ही ठगों ने फोन पर उनकी लोकेशन वॉच की और गेट से दूर एक सुनसान जगह पर बुला लिया। ठगों ने फोन पर कहा, हम एक बैंक खाता भेज रहे हैं, पहले वेरिफिकेशन के लिए इसमें 5 रुपए का ट्रांजेक्शन करो, फिर आपके माल का पूरा पेमेंट ट्रांसफर करेंगे। बिना माल चेक किए भुगतान करने और अनजान खाते में पैसे डालने की जिद पर पिंकी को शंका हुई। उन्होंने गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से बात की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। साइबर अपराधियों के नए हथकंडे, जिनमें उलझ रही जनता फर्जी ट्रेडिंग और निवेश एप: टेलीग्राम या वाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर बाजार या क्रिप्टो में 200 गुना मुनाफे का लालच देना। छोटा प्रॉफिट देकर बड़ी रकम हड़प लेना।
APK फाइल से मोबाइल हैक: बैंक, कूरियर या बिजली बिल अपडेट के नाम पर APK फाइल भेजना। इसे इंस्टॉल करते ही मोबाइल का पूरा एक्सेस ठगों के पास पहुंच जाता है।
स्क्रीन शेयरिंग एप: एनीडेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराकर सीधे बैंक खाते साफ करना।
पार्ट-टाइम जॉब/टास्क फ्रॉड: ‘घर बैठे कमाई’ या ‘वीडियो लाइक कर पैसे कमाएं’ जैसे ऑफर देकर पहले छोटा भुगतान करना और फिर बड़े निवेश के नाम पर ठगी करना।
वाट्सएप ‘बॉस’ स्कैम: कंपनी के मालिक या बड़े अफसर की डीपी लगाकर अकाउंटेंट को तत्काल फर्जी खाते में भुगतान का दबाव बनाना।
फर्जी कस्टमर केयर व ई-मेल स्पूफिंग: गूगल सर्च पर नकली हेल्पलाइन नंबर डालना। बड़ी कंपनियों और लॉजिस्टिक व्यापारियों को हूबहू दिखने वाली फर्जी ई-मेल आईडी (स्पूफिंग) से टारगेट करना।
क्यूआर कोड स्कैम: पैसे आपके खाते में आएंगे… कहकर क्यूआर कोड स्कैन कराना, जबकि स्कैन करते ही पीड़ित के खाते से पैसे कट जाते हैं।
केवायसी/बैंक अपडेट पैनिक: “आज ही केवायसी अपडेट न होने पर खाता बंद हो जाएगा” का डर दिखाकर मालवेयर लिंक पर क्लिक कराना और सिस्टम हैक करना।
म्यूल अकाउंट: ठगी की रकम को तुरंत छुपाने के लिए दूसरों के बैंक खाते किराए पर लेना। एक ही रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर जांच को उलझाना। अलग-अलग कारोबारियों को अलग-अलग पर्चेस ऑर्डर
जो मामले सामने आए हैं, उनमें ठगों ने अलग-अलग कारोबारियों को अलग-अलग पर्चेस ऑर्डर भेजकर ठगी का प्रयास किया है। आर्मी स्कूल के नाम पर स्टेशनरी, आर्मी हॉस्पिटल के नाम पर भी खरीदी के ऑर्डर भेजने के मामले सामने आए हैं। ताजा मामले में जिस सिलीकॉन प्रॉडक्ट की बात कही जा रही, उसका उपयोग संभवत: मिलिट्री बैरक और क्वार्टर्स की वाटरप्रूफिंग, सड़कों और ब्रिजेज के जॉइंट्स और आर्मी अस्पतालों और लैब्स की सीलिंग में हो सकता है। कई उद्योगपतियों से हुई है ठगी
साइबर ठगों ने केंटोनमेंट बोर्ड के नाम से फर्जी दस्तावेज, पर्चेस ऑर्डर व अन्य तरीके से कई उद्योगपतियों से धोखाधड़ी के प्रयास किए हैं। कुछ कारोबारियों से ठगी हो भी चुकी है। इसे लेकर हमने इंदौर पुलिस कमिश्नर, ग्रामीण एसपी और साइबर सेल एसपी के कार्यालयों में पत्राचार व ई-मेल भी किए हैं।
– सतीश अग्रवाल, ऑफिस सुपरिंटेंडेंट, केंटोनमेंट बोर्ड



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