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बालोद में ट्रक ने 8 मवेशियों को कुचला:हाईवे पर बिखरे शव,हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था; एक सप्ताह में 7वीं घटना




बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर बैठे मवेशियों के झुंड को कुचल दिया। इस हादसे में 8 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाईवे पर मवेशियों के शव बिखर गए। गौसेवक अजय यादव के अनुसार, यह घटना गोंदली केनाल के आगे हुई। हादसे के बाद, मृत मवेशियों को जेसीबी की मदद से सड़क से हटाकर दफन किया गया। यह बालोद शहर और आसपास के मार्गों पर मवेशियों से जुड़ी एक सप्ताह के भीतर सातवीं घटना है। बेंदराकोना मोड़ से झलमला चौक तक रात के समय सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन हादसों में मवेशियों की मौत हो रही है या वे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद, सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि सड़कों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े को लेकर हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार और एनएचएआई को कई बार फटकार लगा चुका है। न्यायालय ने मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था और मवेशियों को सड़कों पर आने से रोकने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बावजूद, बालोद की सड़कों पर हालात में कोई सुधार नहीं आया है। बालोद जिले में 4,984 घुमंतू मवेशी पशुधन विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बालोद जिले में 4,984 घुमंतू मवेशी हैं। इनमें गुंडरदेही में 2,224, बालोद में 1,136, गुरूर में 739, डौंडीलोहारा में 603 और डौंडी में 282 मवेशी हैं। इतनी बड़ी संख्या में घुमंतू मवेशियों के लिए स्थायी आश्रय और प्रभावी प्रबंधन नहीं होने का असर सीधे सड़कों पर दिखाई दे रहा है। रात में मुख्य मार्गों पर बैठे मवेशी वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। अंधेरे में काले रंग के मवेशी दिखाई नहीं देते और अचानक सामने आने पर वाहन चालक ब्रेक लगाने या उन्हें बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने पूछा था- लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी? जुलाई 2025 में रतनपुर हाईवे पर 17 गोवंश की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए पूछा था कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पहले कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद ऐसे हादसे लगातार होना गंभीर चिंता का विषय है। लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एनएचएआई से प्रभावी कार्ययोजना मांगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ गौधाम बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संचालन भी प्रभावी होना चाहिए, ताकि मवेशी दोबारा सड़कों पर न आएं। संबंधित विभागों से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई। सरकार ने कोर्ट को नए शेड स्वीकृत होने, मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी लगाने का अभियान चलाने और कुछ गो-मालिकों के खिलाफ एफआईआर की जानकारी दी थी। एनएचएआई ने बैरियर और शेड निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराने की बात भी कही थी। लेकिन बालोद में 8 मवेशियों की मौत बताती है कि दावों और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। बारिश में सड़क बन रही मवेशियों की पनाहगाह मानसून में खेतों में कीचड़ होने और जंगल में मक्खियों से परेशान होने के कारण मवेशी सूखी जगह की तलाश में सड़क तक पहुंच जाते हैं। शाम 7 बजे के बाद मुख्य सड़कों और हाईवे पर इनका जमावड़ा बढ़ जाता है। गंजपारा, बुधवारी बाजार, सिवनी मार्ग, जयस्तंभ चौक और मधु चौक सहित शहर के कई हिस्सों में मवेशी सड़कों पर घूमते नजर आते हैं। कचरे और खाने की तलाश में भी ये सड़क और बाजार क्षेत्रों में पहुंचते हैं। पहले भी सड़क हादसों में गई कई मवेशियों की जान – 10 अगस्त 2025 की रात आमापारा में बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर तेज रफ्तार आयरन ओर से भरे ट्रक ने सड़क पर बैठे 5 गौवंश को कुचल दिया था।

– इसके अगले दिन 11 अगस्त 2025 को सिवनी के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से 3 गौवंश की मौत हुई थी। उसी शाम खरखरा केनाल टर्निंग के पास एक और गौवंश की वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। यानी 24 घंटे के भीतर इन घटनाओं में 9 मवेशियों की जान गई थी।

– 18 अक्टूबर 2025 को अर्जुन्दा क्षेत्र के टिकरी-सिकोसा मार्ग पर हाइवा ने सड़क पर बैठे गौवंश के झुंड को कुचल दिया था। हादसे में 11 गायों की मौत हुई थी और 2 गंभीर रूप से घायल हुई थीं।

– वहीं 19-20 अक्टूबर 2025 की रात नेशनल हाईवे-930 पर गौवंश के झुंड को बचाने के प्रयास में एक कार अनियंत्रित होकर जिला जेल की बाउंड्रीवॉल से टकराकर पलट गई थी।

कागजों में योजना, सड़क पर मवेशी प्रशासन की ओर से मवेशियों को सड़क से हटाकर गौशाला और गोधाम में रखने की योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन मौजूदा आश्रय स्थलों में क्षमता से अधिक मवेशी होने के कारण व्यवस्था दबाव में है। नए मवेशियों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने पर वे दोबारा सड़कों पर लौट आते हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ 8 मवेशियों की मौत का नहीं है। जब जिले में 4,984 घुमंतू मवेशियों का सरकारी आंकड़ा मौजूद है, हाईकोर्ट कई बार जिम्मेदारों को निर्देश दे चुका है और पुराने हादसों का रिकॉर्ड सामने है, तो सड़कों से मवेशियों को हटाने की स्थायी व्यवस्था कब होगी?



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