![]()
शिव आराधना का प्रमुख पर्व श्रावण मास इस बार पंचांगों के अंतर के कारण अलग-अलग तिथियों से शुरू हो रहा है। जहां मेवाड़ में श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है, वहीं डूंगरपुर-बांसवाड़ा सहित वागड़ क्षेत्र में यह 13 अगस्त से शुरू होगा। इसका मुख्य कारण उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग और वागड़ सहित दक्षिण-पश्चिम भारत में प्रचलित अमावस्यांत पंचांग के अनुसार मास की गणना है, जिसके चलते दोनों परंपराओं में श्रावण के आरंभ में लगभग 15 दिन का अंतर रहता है। श्रावण मास के अवसर पर जिलेभर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। 13 अगस्त से डूंगरपुर जिले के बेणेश्वर धाम, देवसोमनाथ महादेव मंदिर, भुवनेश्वर शिवालय और कटकेश्वर महादेव मंदिर सहित कई शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। शहर के नया महादेव मंदिर में अनुष्ठानों के साथ नाव मनोरथ का भी आयोजन किया जा रहा है। पंडित संजय पंड्या शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय मास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने इसी अवधि में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी, जिसके बाद देवताओं ने उनका जल से अभिषेक किया था। इसी परंपरा के कारण श्रावण में शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है। पंडित संजय पंड्या ने यह भी बताया कि श्रावण में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा का भी विधान है। सोमवार को भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है, और श्रावण की शिवरात्रि को भी विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव अभिषेक के लिए पंचामृत, दूध, जल, बिल्वपत्र, शमी पत्र, धतूरा, कुश और कमल आदि अर्पित करने चाहिए। पार्थिव शिवलिंग का पूजन भी श्रावण में विशेष माना गया है। जल, आकाश, अग्नि, वायु, पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा और यजमान से जुड़ी शिव की आठ मूर्तियों की आराधना आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Source link
वागड़ में श्रावण मास 13 अगस्त से शुरू:शिव मंदिरों में होंगे अनुष्ठान, बेणेश्वर और देवसोमनाथ भुवनेश्वर शिवालयों में उमड़ेंगे भक्त
