हरियाली तीज पर ठाकुर बांके बिहारी जी वर्ष भर में एक ही दिन स्वर्ण-रजत हिंडोला में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देते हैं (फाइल फोटो)
हरियाली तीज पर ठाकुर बांके बिहारी जी वर्ष भर में एक ही दिन स्वर्ण-रजत हिंडोला में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि एक दिन ही स्वर्ण-रजत हिंडोला में आराध्य के विलक्षण दर्शन की इच्छा लिए देश दुनिया के लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे
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स्वर्ण आभा बिखेरता दिखाई देगा झूला
हरियाली तीज पर ठाकुर बांके बिहारी जी बेशकीमती स्वर्ण-रजत हिंडोला में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। हरियाली तीज पर ठाकुर बांके बिहारी जी जिस स्वर्ण-रजत हिंडोला में विराजित होते हैं, ये हिंडाला देश को मिली आजादी वाले वर्ष में ही ठाकुर जी को बेरीवाला परिवार ने अपने सहयोगियों के साथ तैयार करवाकर समर्पित किया था। 79 वर्ष पहले मंदिर को अर्पित हुए इस स्वर्ण-रजत हिंडोला की इस बार स्वर्ण पॉलिश बेरीवाला परिवार ने करवाई है। यही कारण है कि इस बार ठाकुरजी का स्वर्ण-रजत हिंडोला स्वर्ण आभा बिखेरता दिखाई देगा।

भगवान का स्वर्ण-रजत हिंडोला स्वर्ण आभा बिखेरता दिखाई देगा
19 अगस्त को पहली बार विराजे बांके बिहारी
मंदिर सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने बताया देश की आजादी से ठाकुर बांके बिहारी जी के स्वर्ण-रजत हिंडोला का बड़ा नाता रहा है। 15 अगस्त 1947 में देश को आजादी मिली थी, इसी वर्ष 1947 में 19 अगस्त को हरियाली तीज पड़ी थी। जिस दिन देश आजादी की पहली सुबह का अनुभव कर रहा था, इसी दिन मंदिर को ठाकुरजी का ये स्वर्ण-रजत हिंडोला अर्पित किया गया। जिसमें 19 अगस्त 1947 को ठाकुर बांके बिहारी जी ने बैठकर भक्तों को पहली बार दर्शन दिए थे।

19 अगस्त 1947 को ठाकुर बांके बिहारी जी ने बैठकर भक्तों को पहली बार दर्शन दिए थे
दिल्ली के कारीगरों ने 22 दिन में किया साफ
इसके बाद इस स्वर्ण-रजत हिंडोले का संरक्षण बेरीवाला परिवार ही करता रहा और मंदिर में ही इस हिंडोला को संरक्षित कर रखने की व्यवस्था की गई। मंदिर के एक कमरे में हिंडोला के 125 हिस्सों को अलग-अलग करके रूई में लपेटकर बाक्स में रखा जाता है। जब हरियाली तीज पड़ती है तो एक दिन पहले हिंडोला निकालकर सफाई कर मंदिर जगमोहन में स्थापित करते हैं। हर बार केवल हिंडोला की साफ-सफाई होती थी। लेकिन, 79 वर्ष बाद इस हिंडोला की स्वर्ण पॉलिश कराई गई है। इसके लिए दिल्ली से विशेष दस कारीगरों की टीम ने 22 दिनों में हिंडोला की स्वर्ण पालिस कर इसे नया रूप रंग दिया है।

दस कारीगरों की टीम ने 22 दिनों में हिंडोला की स्वर्ण पालिस कर इसे नया रूप रंग दिया है
125 हिस्सों में बने हिंडोला को बनाने में लगे पांच वर्ष
ठाकुर बांके बिहारी के भक्त हरगुलाल बेरीवाला ने अपने साथियों के सहयोग से तैयार करवाए हिंडोले में एक लाख तोला चांदी, दस हजार तोले सोना एवं शीशम, साल व सागवान की लकड़ी का उपयोग कराया। नेपाल के टनकपुर के जंगल से मंगवाई लकड़ी से बेरीवाला परिवार ने बनारस के कारीगर छोटेलाल व ललन भाई के बीस कारीगरों के सहयोग से पांच वर्ष में हिंडोला तैयार करवाया। हिंडोला के 125 हिस्सों में नाचते मयूर, टेड़ेमेड़े खंभे, घुमावदार सीढ़ियां, ललिता, विशाख, चित्रलेखा व रंगदेवी नामक सखियों की आदमकद मूर्तियों के साथ हिंडोले पर उकेरे गए बेलबूटों की कलात्मकता भक्तों को आकर्षित करती है।

बांके बिहारी जी का झूला 125 हिस्सों में है
सुरक्षा के रहेंगे कड़े इंतजाम
15 अगस्त को इस बार हरियाली तीज पर्व पड़ने के कारण भीड़ के अधिक रहने की संभावना है। भगवान बांके बिहारी और अन्य मंदिरों में भगवान के झूला झूलते हुए दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वृंदावन को 4 जोन 18 सेक्टर में बांटा गया है। इसके साथ ही डाइवर्जन प्लान और बाहर से आने वाली गाड़ियों की नो एंट्री की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य जिलों से 100 से ज्यादा यातायात पुलिस कर्मी बुलाए गए हैं।

श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वृंदावन को 4 जोन 18 सेक्टर में बांटा गया है
1 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी रहेंगे तैनात
एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि हरियाली तीज के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर में एक हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। उन्होंने बताया पिछले साल 6 लाख श्रद्धालु आए थे इस बार इससे कई गुना ज्यादा भक्तों के आने की संभावना है। जोन के प्रभारी ADM और ASP रहेंगे। मंदिर के बाहर और अंदर CCTV और होल्डिंग बैरियर की मदद से भीड़ कंट्रोल की जाएगी। होटल गेस्ट हाउस,आश्रम संचालकों को निर्देश दिए गए हैं। सिविल पुलिस के अलावा पीएसी,फ्लड पीएसी, बॉम्ब स्क्वायड टीम और सादा वर्दी में पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे।
गेट नंबर 2 और 3 से मिलेगा प्रवेश
विद्यापीठ से आने वाले श्रद्धालु मंदिर के गेट संख्या तीन और जुगलघाट से आने वाले श्रद्धालु गेट संख्या दो से प्रवेश करके गेट संख्या एक और चार से बाहर निकलेंगे। जबकि गेट संख्या पांच पूरी तरह श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंधित रहेगा। इस गेट से मंदिर सेवायतों को ही प्रवेश मिलेगा। सनेह बिहारी मंदिर की ओर से भी श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
