चंडीगढ़ | आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले के बाद राज्य सरकार ने बैंकों में होने वाले लेनदेन को लेकर नए नियम बना दिए हैं। खातों में होने वाली गड़बड़ी के लिए संबंधित बोर्ड, निगम और स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। अब सभी विभागाध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को बैंकों में जमा सरकारी फंड के मिलान का त्रैमासिक प्रमाण पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। वित्त विभाग ने इस संबंध में इन संस्थाओं के एमडी, सीएम और सीईओ को निर्देश जारी कर दिए हैं। अफसरों को बताना होगा कि बचत, चालू, फिक्स्ड डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की समीक्षा की गई है और इसमें कोई अंतर या विसंगति नहीं है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सरकारी खातों में बड़ी गड़बड़ी मिली थी। मामले में तीन आईएएस जेल भी जा चुके हैं। अभी मामले की सीबीआई व ईडी जांच कर रही है। अफसरों को हर 3 माह में अपने साइन करके रिपोर्ट सौंपनी होगी अधिकारियों को हर 3 महीने में अपने हस्ताक्षर करके रिपोर्ट सौंपनी होगी। बताना होगा कि बैंकों में जमा राशि का संस्था के खातों से मिलान कर लिया गया है। बचत, चालू, फिक्स्ड डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की समीक्षा की गई है और इसमें कोई अंतर नहीं है। खाते वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ही संचालित किए जा रहे हैं। बैंकों द्वारा दिया जाने वाला ब्याज खाते में जमा हुआ है या नहीं। बैलेंस शीट के आंकड़े बैंकों के रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाते हैं।
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अब बोर्ड, निगमों, स्वायत्त संस्थाओं को हर तीसरे माह में बैंक खातों का सरकार को देना होगा हिसाब
