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हिरवा दाल, धान, चावल और बांस से तैयार हो रहीं आकर्षक राखियां



भास्कर न्यूज | कोंडागांव जिले की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से लखपति दीदी पहल के अंतर्गत भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कोंडागांव द्वारा महिलाओं को राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर आकर्षक, बाजार में बिक्री योग्य राखियां तैयार करने का हुनर सिखाया गया। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित 6 दिवसीय राखी निर्माण प्रशिक्षण शिविर में बिहान समूह से जुड़ी 25 महिलाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पारंपरिक त्योहारों से जुड़े उत्पादों के निर्माण के माध्यम से महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराना है। इससे वे अपने घर और गांव में रहकर ही स्वरोजगार शुरू कर सकें। आरसेटी की श्रीमती सालनी देवांगन ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को राखी निर्माण के साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का बेहतर उपयोग कर आकर्षक उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में खैरागढ़ से आईं प्रशिक्षक राजेश्वरी अग्रवाल ने महिलाओं को धान, चावल, दाल, बांस सहित अन्य स्थानीय सामग्रियों से आकर्षक, पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। जिला कार्यालय में लगाया गया बिक्री स्टॉल: प्रशिक्षण के बाद महिलाओं द्वारा तैयार राखियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए मंगलवार को जिला कार्यालय परिसर में राखी बिक्री स्टॉल लगाया गया। स्टॉल में बिहान समूह की महिलाओं द्वारा तैयार विभिन्न प्रकार की राखियां प्रदर्शित की गईं। स्थानीय सामग्री से तैयार इन राखियों को देखने और खरीदने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों सहित अन्य लोगों ने स्टॉल का अवलोकन किया। स्टॉल के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। इससे बाजार की मांग समझने में भी मदद मिली। प्रशिक्षण के साथ उत्पाद की बिक्री का व्यावहारिक अनुभव महिलाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हिरवा दाल का उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार कीं। सामान्य रूप से खाद्य सामग्री के रूप में उपयोग होने वाली दाल को रचनात्मक तरीके से राखी के रूप में तैयार किया गया। इससे महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया। धान, चावल, दाल और बांस जैसी स्थानीय सामग्री से तैयार की गई राखियां न केवल देखने में आकर्षक हैं। इनमें स्थानीयता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जुड़ा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को राखी की डिजाइन, सजावट, सामग्री का संयोजन, उत्पाद को बाजार के अनुरूप आकर्षक बनाने की जानकारी दी गई।



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