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टीडीपीएल को 10% कमीशन पर जेएसएससी में कराया था इंपैनल:टीडीपीएल के अभय तिवारी ने अब जेएसएससी में गड़बड़ी का खुलासा किया




जेएसएससी के एएसओ को अभय तिवारी ने आयोग के मैदान में दिया था 5 लाख रु. जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली की जांच कर रही सीआईडी के सामने आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और निदेशक रामवीर सिंह ने पूछताछ में स्वीकारा कि जेएसएससी में भी बायोमेट्रिक्स का काम पाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और साठगांठ की गई थी। तिवारी ने बताया कि 2023 में उसने जएसआर एजेंसी में प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम शुरू किया था। वहां स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधारित भर्ती में उसे नौ लाख रुपए कमीशन मिला था। इसके बाद दिल्ली निवासी उसके मित्र शैंटी उर्फ लालू प्रसाद (अब दिवंगत) ने टीडीपीएल को जेएसएससी में टेंडर दिलाने के लिए संपर्क किया। इसके लिए कुल बिलिंग का 10 प्रतिशत कमीशन तय हुआ। इधर, अनिमा हांसदा, धर्मेंद्र और अरुण से पूछताछ: अनिमा बोली- मैं निर्दोष, ख्यांगते के स्तर पर हुआ टीडीपीएल का चयन सीआईडी ने शुक्रवार को जेपीएससी की पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा से पूछताछ की। अनिमा ने गड़बड़ी में किसी तरह की अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए खुद को निदोर्ष बताया। टीडीपीएल के चयन संबंधी सवाल पर कहा कि यह फैसला तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते के स्तर पर लिया गया था। एजेंसी चयन में अन्य सदस्यों की भूमिका पर वह कोई ठोस जानकारी नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों की निगरानी के बावजूद उन्हें किसी अनियमितता की भनक तक नहीं लगी। इससे पहले सीआईडी 10 अगस्त को डॉ. अजिता भट्टाचार्य और 12 अगस्त को डॉ. जमाल अहमद से भी पूछताछ कर चुकी है। बिंसिस को दो करोड़ में मिला था काम, धर्मेंद्र ने कराया था सौदा सीआईडी ने रिमांड पर चल रहे पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार से चौथे दिन और बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा से तीसरे दिन भी कड़ी पूछताछ की। जांच एजेंसी ने दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों की क्रॉस चेकिंग की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। ऑपरेटर धर्मेंद्र ने कबूल किया कि पूर्व अध्यक्ष का खास होने के कारण वह उनके लिए वसूली से लेकर परीक्षा एजेंसी सेट करने तक का काम संभालता था। वहीं, निदेशक अरुण कुमार ने स्वीकार किया कि जेपीएससी में काम पाने के लिए दो करोड़ रुपए में सौदा तय हुआ था, जिसे धर्मेंद्र ने ही कराया था। घाटा होने पर टीडीपीएल हटी, फिर वेबल का हुआ प्रवेश अभय ने बताया कि टीडीपीएल को सबसे पहले जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में बायोमेट्रिक्स का काम मिला था। हालांकि, तय दरें कम होने और घाटा होने के कारण कंपनी ने आगे काम करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आयोग ने उसे डी-इम्पैनल कर दिया। इसके बाद अभय तिवारी का संपर्क वेबल एजेंसी से हुआ। उल्लेखनीय हो कि वेबल एजेंसी पर भी बोकारो में छात्रों को प्रश्नों के उत्तर रटाकर धांधली कराने का आरोप है।



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