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ईडी ने पंजाब में सरकारी विभागों में कथित लेन-देन और अधिकारियों की पोस्टिंग में दखल से जुड़े मामले में डीजीपी गौरव यादव को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। 11 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में एक आईएएस अधिकारी पर मार्कफेड की टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। ईडी ने जांच में मोहाली निवासी नितिन गोहल को बिचौलिया बताया है। एजेंसी के अनुसार, छापेमारी के दौरान बरामद मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्ड व दस्तावेजों की जांच में सरकारी अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग के साथ-साथ टेंडर व अन्य सरकारी फैसलों में कथित हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं। अब विस्तार से पढ़ें ED की जांच में क्या पता चला:- ईडी ने कई कानूनों के तहत जांच की बात कही ईडी के पत्र में मोहाली की एक प्रमुख निजी यूनिवर्सिटी द्वारा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी मांगने से जुड़ी चैट का भी उल्लेख है। 1 अप्रैल 2026 की बातचीत में कथित तौर पर भुगतान किए जाने और काम जल्दी कराने की बात कही गई थी। बागवानी विभाग के एक अधिकारी को लेकर भी चैट में भुगतान का जिक्र होने का दावा ईडी ने किया है। ईडी ने कहा है कि मामले में आधिकारिक गोपनीयता कानून और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी जांच की जरूरत हो सकती है। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 420, 467 और 471 के तहत अपराध होने की आशंका जताते हुए यह जानकारी धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत पंजाब पुलिस के साथ साझा की है। सरकार ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की ईडी के पत्र पर अब तक पंजाब सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने नहीं आई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी राय ली जा रही है। वहीं, नितिन गोहल पहले ही आरोपों से इनकार कर चुके हैं। उनका कहना है कि किसी से चैट करना या किसी अधिकारी के तबादले की सिफारिश करना अपने आप में अपराध नहीं है। उनके मुताबिक, अगर तबादला कराने के लिए पैसे लिए जाएं, तभी यह अपराध की श्रेणी में आता है।
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ED का पंजाब IAS पर टेंडर प्रभावित करने का आरोप:डीजीपी को भेजा लेटर, FIR दर्ज करने की मांग; रेड में हाथ लगी व्हाट्सऐप चैट
