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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में मंगलवार शाम को भूकंप के दो बैक-टू-बैक झटके महसूस किए गए। महज 45 मिनट के भीतर आए इन दो झटकों के कारण पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग घबराकर अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों से बाहर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। दोनों ही भूकंपों का केंद्र जमीन के बेहद करीब (सिर्फ 5 किलोमीटर नीचे) था। गहराई कम (उथली) होने के कारण लोगों को इसके झटके काफी जोरदार और डरावने महसूस हुए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की टाइमिंग और तीव्रता जान-माल के नुकसान की खबर नहीं गनीमत यह रही कि इस प्राकृतिक हलचल से अभी तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या संपत्तियों/इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा ले रहा है।
बेहद संवेदनशील ‘सीस्मिक जोन’ में है यह इलाका भूवैज्ञानिकों के अनुसार, कांगड़ा, धर्मशाला और चंबा का यह पूरा क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह पूरा इलाका अति-संवेदनशील ‘सीस्मिक जोन 5’ के अंतर्गत आता है। हिमालयी क्षेत्र के नीचे स्थित टेक्टोनिक प्लेटों में लगातार होने वाली हलचल और दबाव के कारण इस बेल्ट में अक्सर छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। प्रशासन अलर्ट पर, अफवाहों से बचने की अपील इन लगातार झटकों के बाद हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन की टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। प्रशासन ने सभी उपमंडलों से क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, संयम बनाए रखें और सतर्क रहें।
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कांगड़ा-चंबा में 45 मिनट में दो भूकंप झटके:पहले 3.6, फिर 4.0 तीव्रता के झटके; लोग घरों से बाहर निकले, कोई नुकसान नहीं
