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चंडीगढ़ में इंस्पेक्टर को बचाने का आरोप DSP तलब:6 करोड़ की लूट मामला, 27 अगस्त 3 अधिकारियों समेत पेश होने के निर्देश




चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की गिरफ्तारी के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामला उत्तर प्रदेश के बागपत में एक निजी कंपनी से करीब 6 करोड़ रुपए की लूट के आरोपियों को बचाने की कथित साजिश से जुड़ा है। आरोप है कि लूट के आरोपियों को यूपी पुलिस से बचाने के लिए चंडीगढ़ में फर्जी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजने की योजना बनाई गई थी। इस मामले में गिरफ्तार किए गए इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनके वकील हरीश भारद्वाज ने जिला अदालत में डिस्चार्ज याचिका दायर कर दावा किया है कि जसमिंदर के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से पूछा कि आखिर जसमिंदर को गिरफ्तार करने का आधार क्या था। पुलिस अधिकारी इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी धीरज, इंस्पेक्टर बलदेव और सब इंस्पेक्टर ओम प्रकाश को जवाब देने के लिए तलब किया है। तीनों पुलिस अधिकारियों को 27 अगस्त को अदालत में पेश होकर यह बताना होगा कि आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ गिरफ्तारी के समय पुलिस के पास कौन-कौन से ठोस सबूत थे। बचाने के लिए फर्जी केस में फंसाने का आरोप पुलिस के मुताबिक, मामला तब सामने आया था जब 24 मार्च 2025 को चंडीगढ़ पुलिस ने राकी मित्तल और गौरव नाम के दो युवकों को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि दोनों युवक उत्तर प्रदेश के बागपत में एक निजी कंपनी से करीब 6 करोड़ रुपए की लूट के बाद चंडीगढ़ पहुंचे थे। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने अपने जानकारों के जरिए तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह से संपर्क किया। इसके बाद आरोपियों को यूपी पुलिस से बचाने की योजना बनाई गई आरोप है कि दोनों को चंडीगढ़ में आर्म्स एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार दिखाकर जेल भेजने की योजना थी। ऐसा इसलिए किया जाना था, ताकि यूपी पुलिस उन्हें बागपत की लूट के मामले में गिरफ्तार न कर सके और वे चंडीगढ़ की जेल में ही रहें। साजिश का पता चलते ही इंस्पेक्टर गिरफ्तार जांच के दौरान चंडीगढ़ पुलिस को कथित साजिश की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने लूट के आरोपियों को बचाने में मदद की और उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेजने की साजिश में शामिल रहे। हालांकि, इंस्पेक्टर जसमिंदर ने इन आरोपों को गलत बताया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत से जमानत भी मिल गई थी। इसके करीब एक साल बाद पुलिस विभाग ने उनका निलंबन आदेश वापस लेकर उन्हें बहाल कर दिया था। जसमिंदर सिंह की ओर से अदालत में दायर डिस्चार्ज याचिका में एडवोकेट हरीश भारद्वाज ने पुलिस की जांच और गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसी मामले में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी ने अपने कथित कबूलनामे में इंस्पेक्टर जसमिंदर का नाम लिया था। वकील के अनुसार, इसके अलावा पुलिस के पास जसमिंदर के खिलाफ कोई ऐसा ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि वह लूट के आरोपियों को बचाने की साजिश में शामिल थे। न कॉल डिटेल, न लेन-देन और न सीसीटीवी डिस्चार्ज याचिका में बचाव पक्ष ने दावा किया है कि पुलिस के पास जसमिंदर के खिलाफ न तो कोई कॉल डिटेल है, न ही कोई वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड। इसके अलावा किसी तरह की सीसीटीवी फुटेज या स्वतंत्र गवाह का बयान भी पुलिस के पास नहीं है। वकील ने अदालत में यह भी दावा किया कि जब जसमिंदर को यूपी की लूट की घटना की जानकारी मिली थी, तब उन्होंने खुद यूपी पुलिस को इसकी सूचना दी थी। बचाव पक्ष का कहना है कि यदि जसमिंदर आरोपियों को बचाने की साजिश में शामिल होते तो वह यूपी पुलिस को इसकी जानकारी क्यों देते। इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी को लेकर सवाल डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस से इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी को लेकर सवाल किए। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि जसमिंदर सिंह को गिरफ्तार करने के लिए उनके पास क्या ठोस सबूत थे। पुलिस की ओर से मौजूद अधिकारी इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद अदालत ने डीएसपी धीरज, इंस्पेक्टर बलदेव और सब इंस्पेक्टर ओम प्रकाश को तलब कर लिया। अब तीनों अधिकारियों को 27 अगस्त को अदालत में पेश होकर अपना जवाब देना होगा। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि जसमिंदर सिंह की गिरफ्तारी के समय जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कौन-कौन से सबूत मौजूद थे और गिरफ्तारी किस आधार पर की गई थी। गिरफ्तारी के बाद मिला जमानत का लाभ इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह को पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद वह कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। वहीं करीब एक साल बाद पुलिस विभाग ने उनका निलंबन वापस लेकर उन्हें दोबारा बहाल कर दिया था। अअब उनकी ओर से दायर डिस्चार्ज याचिका पर अदालत में सुनवाई चल रही है। 27 अगस्त की सुनवाई में पुलिस अधिकारियों का जवाब महत्वपूर्ण होगा। इसके आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला कर सकती है।



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