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पंजाब में आपराधिक मामलों की जांच में हो रही देरी पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने सभी एसएसपी और पुलिस कमिश्नरों को अपने क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय से लंबित आपराधिक मामलों की पूरी सूची पेश करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने जांच में देरी के कारण आरोपियों की स्थिति, गिरफ्तारी, आरोपियों को भगोड़ा घोषित करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई समेत पूरी जानकारी मांगी है। यह मामला जस्टिस एनएस शेखावत की अदालत में जसपाल सिंह उर्फ घोघा उर्फ सोनू की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक आपराधिक मामलों की जांच लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है। 565 FIR की जांच 3 साल से लंबित अदालत के सामने अमृतसर ग्रामीण के SSP की ओर से दाखिल हलफनामे में सामने आया कि जिले के अलग-अलग थानों में 565 FIR की जांच 3 साल से अधिक समय से लंबित है। इन मामलों में कुल 1219 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि 105 आरोपी बेगुनाह पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1168 आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। इनमें से केवल 48 आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है। इसके अलावा 80 मामलों में जांच अधिकारियों की फाइलें भी तीन साल से अधिक समय बीतने के बावजूद गायब हैं। अदालत ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि 565 FIR की जांच इतने लंबे समय से लंबित रहना बेहद चिंताजनक है। इससे इन मामलों में अपराध के पीड़ितों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अब जानिए हाईकोर्ट ने किन मामलों पर जताई नाराजगी… 3 साल से लंबित 565 FIR: अमृतसर ग्रामीण SSP के हलफनामे में सामने आया कि जिले के अलग-अलग थानों में 565 FIR की जांच 3 साल से ज्यादा समय से लंबित है। इन मामलों में 1219 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, 105 आरोपी बेगुनाह पाए गए हैं, जबकि 1168 आरोपी अभी भी गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। सिर्फ 48 आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया: अदालत ने पाया कि 1168 आरोपियों के गिरफ्तार नहीं होने के बावजूद केवल 48 आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ आरोपी देश छोड़कर भी जा चुके हो सकते हैं, लेकिन पिछले तीन साल में उन्हें भगोड़ा घोषित करने या उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। 80 मामलों की जांच फाइलें गायब: हाईकोर्ट के सामने यह भी सामने आया कि 80 मामलों में जांच अधिकारियों की फाइलें ही गायब हैं। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर लापरवाही माना। अदालत ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। अधिकारियों की भूमिका पर सख्त टिप्पणी: हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित थानों के निगरानी अधिकारियों की भूमिका बेहद लापरवाही वाली रही है। अदालत ने यह भी कहा कि पिछले तीन साल में संबंधित SSP भी इन तथ्यों का संज्ञान लेने में असफल रहे। अदालत के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में जांच लंबित रहने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी प्रभावी नहीं रही। हत्या की FIR, 2 साल में गिरफ्तारी नहीं हाईकोर्ट ने इससे पहले 23 जुलाई को पाया था कि अमृतसर ग्रामीण के कंबोज थाने में 1 सितंबर 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में नामजद आरोपियों को 2 साल से अधिक समय तक गिरफ्तार नहीं किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस सक्रिय हुई और याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत ने अमृतसर ग्रामीण जिले में 3 साल से अधिक समय से लंबित सभी जांचों का पूरा विवरण मांगा था। इसी रिपोर्ट में 565 FIR का आंकड़ा सामने आया। पुलिस तंत्र पूरी तरह ढह गया हाईकोर्ट ने अजनाला थाने में करीब 109 जब्त, बरामद या लावारिस वाहन पड़े होने का भी उल्लेख किया। SSP की रिपोर्ट के अनुसार, थाने के हेड मुंशी कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी तक थाने का चार्ज नहीं संभाला था। उनसे पहले तैनात मुशी ने भी चार्ज नहीं लिया था। अदालत ने इस स्थिति पर भी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि SSP ने खुद माना है कि अजनाला थाने में लंबे समय से इस तरह की लापरवाही जारी है। हाईकोर्ट ने अमृतसर ग्रामीण पुलिस जिले की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हलफनामे से ऐसा प्रतीत होता है कि अमृतसर ग्रामीण पुलिस जिले में पुलिस तंत्र पूरी तरह ढह गया है और वर्ष 2013 से इस पुलिस जिले की ठीक तरीके से निगरानी नहीं हुई। अदालत ने यह भी कहा कि लंबित जांचों की निगरानी राज्य स्तर पर भी नहीं हो रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि गृह विभाग के अधिकारियों को भी इन गंभीर खामियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। पंजाब के जिलों से मांगा लंबित मामलों का हिसाब अमृतसर ग्रामीण की स्थिति सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने अब पंजाब के सभी SSP और पुलिस कमिश्नरों से अपने-अपने जिलों में 3 साल से अधिक समय से लंबित आपराधिक मामलों का पूरा विवरण मांगा है। अदालत ने अधिकारियों को लंबित मामलों की सूची के साथ जांच में देरी का कारण, आरोपियों की स्थिति, कितने आरोपी गिरफ्तार हुए, कितने आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया, कितनी संपत्ति कुर्क की गई और कितनी जांच फाइलें गायब हैं, इसका पूरा ब्योरा देने के आदेश दिए हैं। हर सोमवार सभी SSP से बैठक हाईकोर्ट ने पंजाब डीजीपी को भी निर्देश दिए हैं कि वह हर सोमवार सभी एसएसपी और पुलिस कमिश्नरों के साथ वर्चुअल बैठक करें। इन बैठकों के जरिए लंबित जांचों की निगरानी की जाएगी और उन्हें जल्द पूरा करवाने के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। अदालत ने उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई तक 3 साल से अधिक समय से लंबित सभी जांच पूरी कर ली जाएंगी और लंबे समय से फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो उन्हें जल्द भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके बाद कानून के अनुसार उनकी संपत्ति कुर्क और नीलाम करने की कार्रवाई की जाएगी।
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हाईकोर्ट ने पेंडिंग 565 FIR का मांगा ब्योरा:80 मामलों की फाइलें हो चुकीं गायब; DGP हर सोमवार को करेंगे SSP से बैठक
