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सहरसा के मटेश्वर धाम में अंतिम सोमवारी पर उमड़ा सैलाब:2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक; सुरक्षा में 349 पुलिसकर्मी और 210 दंडाधिकारी तैनात




सहरसा के प्रसिद्ध मटेश्वर धाम में सावन की आखिरी सोमवारी पर भारी भीड़ उमड़ी। सोमवार को दो लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा भोलेनाथ के विशाल शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। बड़ी संख्या में कांवरिया लगभग 80 किलोमीटर दूर मुंगेर जिले के छरापट्टी घाट से कांवड़ में गंगाजल लेकर मटेश्वर धाम पहुंचे। उन्होंने कतारबद्ध होकर बाबा का जलाभिषेक किया। बलवाहाट निवासी मुस्कान कुमारी ने बताया कि वह सावन की आखिरी सोमवारी पर बाबा को जल चढ़ाने पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि सावन के सोमवार को मटेश्वर धाम में जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। इसी आस्था के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कोसी क्षेत्र का प्रमुख और प्राचीन शिवधाम सहरसा मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर काठो पंचायत में स्थित मटेश्वर धाम कोसी क्षेत्र का एक प्रमुख और प्राचीन शिवधाम माना जाता है। मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग की विशेष बनावट और इससे जुड़ी स्थानीय मान्यताएं श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। 349 पुलिसकर्मी और 210 दंडाधिकारी तैनात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल पदाधिकारी सह मटेश्वर धाम न्यास समिति के अध्यक्ष आलोक राय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए माठा चौक से मंदिर परिसर तक त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें 349 पुलिसकर्मियों और 210 दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी। 86 एनसीसी कैडेट और 80 स्वयंसेवक संभाल रहे थे व्यवस्था भीड़ को कतारबद्ध तरीके से नियंत्रित करने के लिए 86 एनसीसी कैडेट और न्यास समिति के लगभग 80 स्वयंसेवक भी लगाए गए थे। मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ का दबाव न बने, इसके लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए थे। महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान जलाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं को तत्काल निकास द्वार से बाहर भेजा जा रहा था। व्यवस्था में महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। प्रशासन और मंदिर न्यास समिति की निगरानी में सावन की अंतिम सोमवारी पर जलाभिषेक शांतिपूर्ण तरीके से कराया गया।



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