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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बोलीं- ईकेवाईसी मानसिक उत्पीड़न, 5 घंटे धरना दिया:कलेक्टर टीना डाबी नहीं मिली तो घंटाघर पर प्रदर्शन किया; ADM को सौंपा ज्ञापन




टोंक की महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में करीब 5 घंटे तक प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन सुबह करीब 11 बजे से शाम पौने 4 बजे तक चला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कलेक्टर टीना डाबी से मिलना चाहतीं थीं। दोपहर में ADM विनोद कुमार मीना भी धरना खत्म करने के लिए समझाने आए , लेकिन महिलाएं नहीं मानी। कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़ गई। इससे नाराज होकर शाम पौने 4 बजे सभी महिलाएं उठकर नारेबाजी करते हुए घंटाघर पहुंची और प्रदर्शन किया। करीब 15 मिनट बाद एडीएम विनोद मीना मौके पर आए और महिलाओं को समझाया कि कलेक्टर जरूरी काम से व्यस्त हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ADM को ज्ञापन सौंपा। इन मांगों का ज्ञापन सौंपा मांगों में बताया- 2 अक्टूबर 1975 को शुरू हुई आईसीडीएस योजना के 50 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने इसकी गोल्डन जुबली मनाने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया। 50 साल की सेवा के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बुनियादी अधिकार न्यूनतम वेतन, पेंशन ग्रेच्युटी और फंड की भी कोई घोषणा नहीं की गई। टोंक जिले के दूरदराज से पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के आने के बाद से 3 से 6 साल के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से हटाकर स्कूलों की औपचारिक शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं निजीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। कहा- काम का बोझ बढ़ा है आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि ताजे पौष्टिक भोजन की जगह पैक्ड फूड, कैश ट्रांसफर और सेंट्रलाइज्ड कॉपोर्रेट किचन लाना और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के नाम से आंगनबाड़ियों की जगह नंद घर बनाना। पिछले कुछ वर्षों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त कामों का बोझ लगातार बढ़ा है, जिसमें एफएसआरटी, ईकेवाईसी ऑनलाइन काम, जनगणना, एसआईआर और बीएलओ की ड्यूटी शामिल हैं। कलेक्टर के नाम ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि 2018 से केंद्र सरकार ने मानदेय में एक पैसा भी नहीं बढ़ाया है, जबकि महंगाई रोज बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ग्रेच्युटी भुगतान के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अभी भी श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटलाइजेशन के नाम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नाजायज तरीके से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खराब मोबाईल फोन, नेटवर्क की समस्याओं और तकनीकी गड़बड़ियों जैसी वजहों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जाता है। रिकग्निशन सिस्टम और ईकेवाईसी मानसिक उत्पीड़न उन्हें फेस रिकग्निशन सिस्टम और ईकेवाईसी को लेकर अपमान और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। जबकि सरकार ने न तो सही 5जी डिवाईस दिए हैं और न ही वाई फाई कनेक्शन।उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से आईसीडीएस के बजट में कटौती के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वेतन नहीं मिल पा रहा है साथ ही कई महीनों से भवन के किराए और अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन के लिए भी फंड नहीं मिल पा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार कि आंगनबाड़ी विरोधी नीतियों के विरोध और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की जायज मांगो को मनवाने के लिए ऑल इण्डिया फेडरेशन ऑफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स ने 10 जुलाई को देशभर में जिला स्तर तक काला दिवस मनाने का फैसला किया है। इसी कड़ी में दस जुलाई को काले कपडे पहनकर और काले झंडे लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों में उषा गुप्ता, गुड्डी लक्षकार, संतरा सोयल, कौशल्या लक्षकार, ममता वर्मा, सजना, निर्मला, गायत्री, बबली, सीमा जांगिड़, मधु शर्मा, प्रतीक्षा, सीमा, नीलू माहुर, शिमला आदि शामिल रही।



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