Headlines

Punjab BJP-Shiromani Akali Dal Alliance Strategy


पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर चर्चा के बीच भाजपा इस बार ‘बड़े भाई’ यानी सीनियर पार्टनर की भूमिका में आने की तैयारी

.

इसी रणनीति के तहत भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पंजाब का दो दिवसीय दौरा कर लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा में नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें कीं।

उन्होंने पार्टी का जमीनी आधार, कार्यकर्ताओं का मूड और ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन की स्थिति का फीडबैक लिया। अंदरूनी गुटबाजी दूर करने के लिए संतोष ने दूसरे दलों से भाजपा में आए नेताओं की तुलना ‘नई बहू’ से करते हुए कहा कि उन्हें परिवार का हिस्सा मानकर सम्मान दिया जाना चाहिए।

वहीं, गठबंधन पर फैसला होने तक नेताओं को सार्वजनिक तौर पर सिर्फ ‘117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी’ वाली लाइन बोलने के निर्देश दिए गए हैं।

बीएल संतोष के 2 दिन के दौरे के क्या मायने रहे? पूरी स्टोरी पढ़िए..

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल (बाएं से दूसरे) संतोष 24 अगस्त को दो दिन के दौरे पर पंजाब आए, इस दौरान उन्होंने नेताओं के साथ कई बैठक कीं।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल (बाएं से दूसरे) संतोष 24 अगस्त को दो दिन के दौरे पर पंजाब आए, इस दौरान उन्होंने नेताओं के साथ कई बैठक कीं।

सिर्फ 117 सीटों की एक लाइन याद रखें

गठबंधन को लेकर जारी चर्चाओं के बीच BJP हाईकमान ने पंजाब इकाई के तमाम छोटे-बड़े नेताओं को एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से नेताओं को निर्देश दिया गया है कि जब तक गठबंधन का कोई आधिकारिक फैसला सार्वजनिक नहीं होता, तब तक कोई भी नेता गठबंधन की संभावनाओं पर स्वतंत्र बयानबाजी नहीं करेगा। चाहे मीडिया का सवाल हो या सार्वजनिक मंच, सभी नेताओं को केवल एक ही आधिकारिक स्टैंड दोहराना है- भाजपा पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रही है और अपने दम पर सरकार बनाएगी।

हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी पंजाब दौरे के दौरान वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में यही बात दोहराई थी। यहां तक कि जब SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की खबरें आईं, तब भी पंजाब प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाकर यही निर्देश दिया गया कि मीडिया के सामने ‘117 सीटों’ वाली आधिकारिक लाइन से इतर कोई टिप्पणी न की जाए। बीएल संतोष की मौजूदगी के बाद भी जब प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों, एच.एस. फूल्का और सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने प्रेस को संबोधित किया, तो सभी ने इसी तय रणनीति के तहत बयान दिए।

‘नई बहू’ का फॉर्मूला देकर दूर की गुटबाजी

पंजाब भाजपा में इस समय एक और बड़ी चुनौती अंदरूनी गुटबाजी और पुराने बनाम नए नेताओं के बीच का समन्वय है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य दलों से आए वरिष्ठ नेताओं को संगठन में तरजीह मिलने के कारण पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं में कुछ असंतोष देखा जा रहा था। बीएल संतोष ने इस अंदरूनी मतभेद को दूर करने के लिए बैठकों में एक खास पारिवारिक उदाहरण दिया।

उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दूसरे दलों से आए नेता हमारे परिवार में आई नई बहू की तरह हैं। जिस तरह शादी के बाद बहू घर आती है और परिवार का अटूट हिस्सा बन जाती है, ठीक उसी तरह बाहर से आए नेता भी अब हमारे अपने हैं और उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत होना चाहिए। कोई भी परिवार तभी सुचारू रूप से चलता है, जब नए सदस्य का अच्छे से स्वागत हो और नया सदस्य भी परिवार के बुजुर्गों व पुराने सदस्यों को पूरा आदर दे।

बीएल संतोष ने स्पष्ट किया कि पुराने कार्यकर्ता पार्टी की असली रीढ़ हैं और उनके योगदान की अनदेखी किसी भी कीमत पर नहीं की जाएगी। उन्होंने नए और पुराने नेताओं को मिलकर एकजुटता से काम करने की सख्त हिदायत दी, ताकि पार्टी गठबंधन की बातचीत में मजबूत स्थिति में रहे।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने बैठक के दौरान नेताओं को गठबंधन को लेकर कोई भी बयान देने से बचने की बात कही।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने बैठक के दौरान नेताओं को गठबंधन को लेकर कोई भी बयान देने से बचने की बात कही।

आंकड़े ‘बड़ा भाई’ बनने का आधार

भाजपा, अकाली दल के सामने सीटों की संख्या को लेकर जो आक्रामक रुख अपना रही है, उसके पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े मुख्य आधार हैं। पार्टी के रणनीतिकार इन आंकड़ों के दम पर अकाली दल पर ज्यादा सीटों का दबाव बना रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब की 117 विधानसभा सीटों के विश्लेषण में भाजपा 23 विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान (लीड) पर रही थी।

इसके विपरीत, अकाली दल केवल 9 विधानसभा सीटों पर ही बढ़त बना सका था, भाजपा 10 विधानसभा हलकों में दूसरे स्थान पर रही, जबकि अकाली दल केवल 7 हलकों में दूसरे नंबर पर रहा। लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला जैसे बड़े शहरों और उनसे जुड़े विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी ने अकाली दल की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया था। इन आंकड़ों को आधार बनाकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अकाली दल को यह संदेश देना चाहता है कि राज्य में सियासी समीकरण बदल चुके हैं और यदि गठबंधन होता है, तो बीजेपी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

ग्रामीण हलकों में नेटवर्क मजबूत करने का प्लान

अकाली दल का पारंपरिक वोट बैंक मुख्य रूप से पंजाब के ग्रामीण इलाकों में माना जाता रहा है। बीएल संतोष ने अपने दौरे में पार्टी कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए। जिन ग्रामीण इलाकों और पंचायतों में भाजपा के बूथ ढांचे कमजोर हैं, वहां तुरंत ‘पन्ना प्रमुख’ और 11 से 15 सदस्यीय बूथ कमेटियां गठित करने का काम शुरू करने को कहा गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों को लेकर छोटे-छोटे चौपाल कार्यक्रमों का आयोजन करने का सुझाव दिया गया है। गांवों में पार्टी का कैडर और नेटवर्क खड़ा करके भाजपा अकाली दल पर यह मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहती है कि बीजेपी अब केवल शहरी पार्टी नहीं रही, बल्कि उसकी पहुंच गांव-गांव तक हो चुकी है।

मीडिया से दूरी और रिपोर्ट कार्ड

अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान बीएल संतोष ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। लुधियाना और जालंधर में मीडियाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद उन्होंने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की और न ही गठबंधन को लेकर कोई ऑन-रिकॉर्ड बयान दिया। पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि गठबंधन के आधिकारिक खाके से पहले मीडिया में किसी तरह का विरोधाभास पैदा हो। इसलिए मीडिया से बातचीत की जिम्मेदारी सिर्फ प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों और स्थानीय नेताओं पर ही रखी गई।

बीएल संतोष अब पंजाब के अपने इस विस्तृत दौरे, क्षेत्रीय बैठकों के फीडबैक, जमीनी कार्यकर्ताओं की राय और 117 सीटों के कैडर रिपोर्ट कार्ड की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर भाजपा हाईकमान पंजाब में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए शिरोमणि अकाली दल के साथ सीटों के बंटवारे और गठबंधन की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय लेगा।

*************

ये खबर भी पढ़ें

पंजाब में BJP-अकाली दल का गठबंधन फाइनल स्टेज पर: BJP ज्यादा सीटों पर लड़ सकती चुनाव, SAD ने ग्रामीण हल्कों की भी जिद छोड़ी

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन हो सकता है। ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों दल गठबंधन को फिर से अंतिम रूप देने के करीब हैं। इस बार BJP गठबंधन में सीनियर पार्टनर की भूमिका में आ सकती है। (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *