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कानपुर में बुधवार दोपहर करीब 1 बजे के बाद शहर के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड से जुलूस-ए-मोहम्मदी की शुरुआत हुई। जमीयत उलमा हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष अमीनुल हक कासमी और पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने हरी झंडी दिखाकर जुलूस को रवाना किया। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। आयोजकों के मुताबिक करीब 2 लाख लोग जुलूस का हिस्सा बने हैं। जुलूस ‘सरकार की आमद मरहबा’ के नारों और गीतों के बीच नई सड़क की ओर बढ़ा। करीब 14 किलोमीटर लंबे जुलूस का रात लगभग 10 बजे फूलबाग पहुंचकर समापन होने की बात कही गई है। जुलूस को देखते हुए ट्रैफिक विभाग ने शहर के कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू किया है, जो जुलूस के समाप्त होने तक जारी रहेगा। रास्ते में जगह-जगह तबर्रुक और खाने-पीने के स्टॉल
जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लोगों के लिए तबर्रुक यानी प्रसाद बांटा जा रहा है। कई स्थानों पर खाने-पीने की चीजों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक बड़ी संख्या में जुलूस में शामिल हुए। नई सड़क इलाके में जुलूस के दौरान इस्लामिक परचम के साथ कई वाहनों पर तिरंगा झंडा भी नजर आया। अकीदतमंद पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर जुलूस में शामिल होकर अपनी आस्था और खुशी का इजहार कर रहे हैं। दिव्यांग महिला दो बच्चों के साथ व्हीलचेयर पर पहुंचीं
जुलूस में एक पैरों से दिव्यांग महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ व्हीलचेयर पर शामिल हुईं। तबस्सुम ने बताया कि आज नबी का जन्मदिन है, इसलिए वह अपने बच्चों को लेकर जुलूस में आई हैं। उन्होंने कहा कि नबी के जन्मदिन पर जुलूस में शामिल होना जरूरी समझती हैं। 114 साल से निकल रहा जुलूस
जमीयत उलमा हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष अमीनुल हक कासमी ने बताया कि शहर में जमीयत उलमा हिंद की देखरेख में करीब 114 साल से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जुलूस का उद्देश्य इंसानियत, भाईचारे और अमन-चैन का संदेश देना है। आयोजकों के मुताबिक 12 रबी अव्वल को पैगंबर-ए-इस्लाम के जन्मदिन के मौके पर निकलने वाले इस जुलूस में हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं। जुलूस के जरिए पूरी दुनिया को इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।
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कानपुर में निकला एशिया का सबसे बड़ा जुलूस:14 Km लंबा जुलूस-ए-मोहम्मदी को पुलिस कमिश्नर ने दिखाई झंडी, दिव्यांग महिला 2 बच्चों को लेकर व्हीलचेयर से पहुंची
