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उत्तर भारत की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा-2026 के दौरान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को उचित मूल्य पर पौष्टिक भोजन, चाय-नाश्ता और सुरक्षित ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और ‘श्री मणिमहेश न्यास भरमौर’ ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर टेंट और ढाबा संचालकों द्वारा श्रद्धालुओं से की जाने वाली अवैध वसूली पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने खाद्य पदार्थों और टेंटों में प्रति बिस्तर ठहरने की दरें आधिकारिक रूप से निर्धारित कर दी हैं। प्रशासन ने यात्रा मार्ग को तीन प्रमुख सेक्टरों भरमौर व हड़सर, धनछो व सुंदरासी तथा गौरीकुंड व डल झील (शिव कुंड) में बांटकर ऊंचाई और ढुलाई लागत के अनुसार दरें तय की हैं। प्रशासन द्वारा तय दाम से अधिक पैसे वसूलने वालों की शिकायत के लिए फोन नंबर, पोर्टल और ई-मेल का विकल्प रहेगा। प्रशासन का सख्त आदेश है कि निर्धारित से अधिक दाम वसूलने वाले दुकानदारों, ढाबा और टेंट मालिकों के लाइसेंस कैंसिल किए जाएंगे। रात के समय पैदल यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित वहीं, 2025 में भयंकर बाढ़ और यात्रियों को हुई परेशानी के चलते प्रशासन ने इस बार यात्रा के संचालन के लिए सख्त नियम तय किए हैं। रात के समय पैदल यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालुओं को सुबह चार बजे से शाम सात बजे तक ही पैदल यात्रा करने की अनुमति होगी। शाम सात बजे से सुबह चार बजे तक किसी भी परिस्थिति में यात्रा मार्ग पर आवाजाही नहीं की जा सकेगी। मणिमहेश में खाने के दामों पर लगेगी लगाम मणिमहेश यात्रा के दौरान अक्सर श्रद्धालु ओवरचार्जिंग के आरोप लगाते हैं। पिछले 8 साल से हर वर्ष यात्रा पर जाने वाले कुशल शर्मा के मुताबिक दुकानों पर 10 रुपए में बिकने वाली मैगी के ही यात्रा मार्ग पर 100 रुपए वसूले जाते थे। इसके अलावा, खीरे, सलाद और चने भी मूल दाम से कई गुणा महंगे दिए जाते थे। लेकिन, यात्रा के दौरान इन खाद्य पदार्थों को खरीदना उनकी मजबूरी थी। जिसके ऊपर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं था। लेकिन, अब मैगी का दाम 30 से 50 रुपए निर्धारित कर दिया गया है। पूरी यात्रा में रात्रि ठहराव महंगा
मणिमहेश यात्रा के दौरान इस रात को ठहरना महंगा हो गया है। प्रति बिस्तर इस बार 250 से 350 रुपये शुल्क तय किया गया है। भरमौर व हड़सर में ठहराव दरें प्रति बिस्तर (3×6) 250 रुपये हैं। वहीं, धनछो से सुंदरासी के बीच 300 और गौरीकुंड से मणिमहेश शिव कुंड में 350 रुपये शुल्क तय किया है। पहले 100 से 150 रुपये में बिस्तर मिल जाता था। लेकिन, इस बार श्रद्धालुओं को 100 से 200 रुपए अधिक खर्च करने पड़ेंगे। रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य, ज्यादा पैसे वसूलने पर यहां करें शिकायत प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि यात्रा मार्ग पर संचालित सभी ढाबों, लंगरों और टेंट दुकानदारों को अपनी दुकानों के बाहर रेट लिस्ट (मूल्य सूची) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी दुकानदार या टेंट संचालक तय दरों से अधिक राशि वसूलता है या श्रद्धालुओं से बदसलूकी करता है, तो श्रद्धालु तुरंत निम्नलिखित माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ओवरचार्जिंग या नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। ओवरचार्जिंग की कर सकेंगे शिकायत पैदल यात्रा को लेकर नियम कड़े यात्रा मार्ग की स्थिति और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने इस बार यात्रा के संचालन के लिए सख्त नियम तय किए हैं। रात के समय पैदल यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालुओं को सुबह चार बजे से शाम सात बजे तक ही पैदल यात्रा करने की अनुमति होगी। शाम सात बजे से सुबह चार बजे तक किसी भी परिस्थिति में यात्रा मार्ग पर आवाजाही नहीं की जा सकेगी। ये 2 स्थान बेहद संवेदनशील प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि मौसम साफ रहने पर भी रात के समय यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यात्रा मार्ग पर तोष का गोठ और दुनाली को बेहद संवेदनशील स्थान चिह्नित किया गया है। इन स्थानों पर मौसम साफ रहने के बावजूद पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। बारिश होने की स्थिति में यात्रा मार्ग के करीब आठ स्थानों को अति संवेदनशील माना गया है। ऐसे में मौसम खराब होने पर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर मार्ग पर आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकता है। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत सुरक्षा व्यवस्था मजबूत यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल राहत और बचाव सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। हेली टैक्सी को मिली डीजीसीए की मंजूरी उधर, मंगलवार को डीजीसीए की अनुमति के अभाव में अटकी हेली टैक्सी सेवा को भी बुधवार को मंजूरी मिल गई। मंजूरी मिलने के बाद भरमौर-गौरीकुंड और होली-गौरीकुंड हेली टैक्सी सेवा शुरू कर दी गई है। इससे पहले हेली टैक्सी सेवा 25 अगस्त से शुरू होनी प्रस्तावित थी, लेकिन डीजीसीए की आवश्यक अनुमति निर्धारित समय तक नहीं मिलने के कारण सेवा शुरू नहीं हो पाई थी। 75 श्रद्धालुओं को करना पड़ा था इंतजार हेली टैक्सी सेवा के लिए पहले ही ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई थी और करीब 75 श्रद्धालुओं ने सेवा के लिए आवेदन किया था। कई श्रद्धालु हवाई सेवा का लाभ लेने के लिए भरमौर पहुंच भी गए थे, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण मंगलवार को उन्हें इंतजार करना पड़ा। अब मंजूरी मिलने के बाद इन श्रद्धालुओं सहित अन्य यात्रियों को हेली टैक्सी सेवा का लाभ मिल सकेगा। पंजीकरण शुल्क अब 50 रुपए यात्रा के दौरान पंजीकरण व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। 22 जून से 24 अगस्त तक इको टूरिज्म सोसाइटी की ओर से एनजीटी के आदेशों के अनुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए 100 रुपए शुल्क लिया गया था। इस अवधि में कुल 5352 श्रद्धालुओं से शुल्क लिया गया। अब यात्रा का संचालन आधिकारिक रूप से न्यास की ओर से किया जा रहा है। इसके तहत इको टूरिज्म सोसाइटी का 100 रुपए पर्यावरण संरक्षण शुल्क बंद कर दिया गया है। अब हड़सर में श्रद्धालुओं से केवल 50 रुपए पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय में ही पैदल यात्रा करें, रात में मार्ग पर जाने का प्रयास न करें और मौसम तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
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हिमाचल की मणिमहेश यात्रा में चाय-टेंट के रेट फिक्स:श्रद्धालुओं से अवैध वसूली होगी बंद; पैदल यात्रियों के लिए भी नियम हुए सख्त
