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चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव को लेकर कैंपस में राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर है कि इस बार छात्र राजनीति से कौन-सा ऐसा चेहरा निकलता है, जो आगे चलकर बड़ी राजनीतिक या कारोबारी पहचान बनाए। पीयू का इतिहास बताता है कि यहां की छात्र राजनीति और शिक्षा से जुड़े कई लोग आगे चलकर देश के बड़े पदों तक पहुंचे हैं। यहां पढ़ने वालों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और विदेशों में बड़े राजनीतिक पदों पर पहुंचने वाले लोग शामिल रहे हैं। अब चुनाव के बीच चर्चा है कि आने वाले वर्षों में पीयू से कौन नया बड़ा नेता या कारोबारी चेहरा निकलता है। पीयू से निकलकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचे पीयू की विरासत में देश के सर्वोच्च संवैधानिक और राजनीतिक पदों तक पहुंचने वाले नाम शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और बाद में यहीं अध्यापन भी किया। वह देश के वित्त मंत्री रहने के बाद प्रधानमंत्री बने। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने अविभाजित पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर से पढ़ाई की थी। वहीं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा का नाम भी पीयू की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है। पीयू से जुड़े लोगों ने राज्य और केंद्र की राजनीति में भी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी जैसे नाम इनमें शामिल हैं। सुखबीर ने अर्थशास्त्र में एमए किया पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने भी पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए किया। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा भी पीयू की पूर्व छात्रा रही हैं।
छात्र राजनीति से संसद तक पहुंचे कंग पीयू की छात्र राजनीति का असर भी आगे की राजनीति में देखने को मिला है। मलविंदर सिंह कंग 2002 में पीयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। बाद में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और अब आनंदपुर साहिब से लोकसभा सांसद हैं। इससे साफ है कि पीयू की छात्र राजनीति सिर्फ कैंपस तक सीमित नहीं रहती। यहां से निकले छात्र नेता आगे चलकर विधानसभा और संसद तक पहुंचे हैं। पीयू से जुड़े बड़े नामों में अभिनेत्री और पूर्व लोकसभा सांसद किरण खेर भी शामिल हैं। उन्होंने यहां थिएटर की पढ़ाई की और बाद में अभिनय के साथ राजनीति में भी पहचान बनाई। वह चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद रहीं। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी तथा पूर्व सांसद और भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे सत्यपाल जैन का भी पीयू से शैक्षणिक जुड़ाव रहा है। पीयू की पहचान सिर्फ भारतीय राजनीति तक सीमित नहीं रही। इसके पूर्व विद्यार्थियों में कनाडा के पूर्व विधायक दीपक आनंद, भूटान के पूर्व गृह मंत्री शेरुब ग्यालत्शेन और केन्या के किआम्बू काउंटी के पहले गवर्नर विलियम गीटाउ जैसे नाम भी शामिल हैं। अब चुनाव में किस पर टिकी नजर पीयू में छात्र संघ चुनाव हर साल नए छात्र नेताओं को सामने लाता है। इस बार भी कई उम्मीदवार अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने मैदान में हैं। इनमें से कौन आगे चलकर विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री या बड़ा कारोबारी बनता है, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन पीयू का इतिहास एक उम्मीद जरूर जगाता है—जिस कैंपस से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक निकले, वहां से इस बार कौन नया बड़ा चेहरा निकलता है, इस पर सभी की नजर है। लाहौर की विरासत भी इस इतिहास का हिस्सा पीयू के पुराने इतिहास को देखते समय लाहौर और चंडीगढ़ के विश्वविद्यालय के बीच अंतर रखना जरूरी है। पंजाब यूनिवर्सिटी की शुरुआत लाहौर में हुई थी और विभाजन के बाद इसका वर्तमान स्वरूप चंडीगढ़ में स्थापित हुआ। इसलिए पुराने दौर के कुछ बड़े नाम अविभाजित पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर से जुड़े हैं, जबकि बाद के कई नाम चंडीगढ़ स्थित विश्वविद्यालय से पढ़े हैं।
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PU चंडीगढ़ में पढ़े कई बड़े नेता, सांसद और मंत्री:पूर्व PM मनमोहन, सुषमा स्वराज ने यहीं से ली शिक्षा; छात्र राजनीति से संसद तक पहुंचे MP कंग
