इस बार रक्षाबंधन जिनी झाला के लिए सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं, बल्कि जिंदगी की नई शुरुआत का दिन बन गया। इंदौर के गैस ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसने के बाद करीब दो महीने से इलाज और रिकवरी से गुजर रहीं जिनी की कलाई पर अहमदाबाद के अस्पताल म
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गंभीर चोटों और लंबे इलाज के बावजूद जिनी ने भाइयों के साथ मुस्कुराते हुए रक्षाबंधन मनाया। उनके चेहरे पर दर्द के साथ जिंदगी में लौटने का भरोसा भी नजर आया। जिनी का कहना है कि हादसे ने उनकी जिंदगी जरूर बदल दी, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ पाया।
सबसे पहले जानिए क्या हुआ था उस दिन…
इंदौर में 23 जून को सुमन नगर जैन मंदिर के पास अवंतिका गैस पाइपलाइन में विस्फोट हो गया था। हादसे में कुल 4 लोग झुलस गए। घायलों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरी राजकुमारी झाला भी शामिल रही।
देखिए उस हादसे की 2 तस्वीरें…


पहले जैसी नहीं, उससे बेहतर बनकर लौटना है
करीब दो महीने की रिकवरी के बाद जिनी अब जिंदगी को नए नजरिए से देख रही हैं। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य केवल हादसे से पहले वाली जिंदगी में लौटना नहीं, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत, आत्मविश्वासी और बेहतर बनकर वापस आना है।
हादसे के बाद परिवार, सपनों, मानसिक शांति और जिंदगी के छोटे-छोटे पलों की अहमियत उनके लिए बढ़ गई है। रक्षाबंधन पर भाइयों का साथ उनके लिए रिकवरी के इस मुश्किल दौर में भावनात्मक ताकत बना।
पिछले साल सामान्य जिंदगी, इस बार अस्पताल में राखी
पिछले साल जिनी ने रक्षाबंधन सामान्य जिंदगी के बीच मनाया था। इस बार उनकी कलाई पर राखी अस्पताल में बंधी। आसपास इलाज का माहौल, शरीर पर चोटों के निशान और आगे लंबी रिकवरी का सफर है। इसके बावजूद इस राखी का संदेश उनके लिए दर्द से ज्यादा उम्मीद और हिम्मत का रहा।
भाइयों ने उनका साथ निभाने का वादा किया तो जिनी ने भी मजबूती से जिंदगी में लौटने का संकल्प लिया। उनके लिए यह राखी एक धागे से बढ़कर दोबारा जिंदगी चुनने और आगे बढ़ने का प्रतीक बन गई।

अस्पताल में अपने भाइयों के साथ जिनी।
ऐसे बदल गई जिनी की जिंदगी
इंदौर की सोशल मीडिया और ट्रैवल-लाइफस्टाइल क्रिएटर जिनी झाला हादसे से पहले अपनी यात्राओं और लाइफस्टाइल कंटेंट के जरिए लोगों से जुड़ी थीं। गैस ब्लास्ट से दो दिन पहले ही उन्होंने पंच केदार यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से केदारनाथ, मध्यमहेश्वर और तुंगनाथ की डोली यात्रा पूरी की थी। इसके बाद वह अपनी दादी से मिलने इंदौर लौटी थीं।
उनकी योजना दिल्ली होते हुए दोबारा उत्तराखंड जाने की थी, लेकिन इसी दौरान हुआ गैस ब्लास्ट उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर बन गया।
कुछ सेकंड में हुआ हादसा
परिवार के मुताबिक, विजय नगर से दादी के घर जाते समय जिनी टिंकूज, जैन मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास से गुजर रही थीं। इसी इलाके में सड़क पर ड्रिलिंग और बोरिंग का काम चल रहा था।
परिवार का आरोप है कि मौके पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। उनके मुताबिक, ड्रिलिंग के दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन प्रभावित हुई और सड़क के नीचे जोरदार गैस ब्लास्ट हो गया। हादसे में जिनी समेत चार लोग घायल हुए।
कपड़ों में लगी आग, खुद पानी में जाकर बुझाई
ब्लास्ट के बाद जिनी स्कूटर से गिर गईं और उनके कपड़ों व बालों में आग लग गई। जान बचाने के लिए उन्होंने सड़क किनारे बने रेन वाटर ड्रेन में जाकर खुद को बार-बार पानी से भिगोया। परिवार के मुताबिक, आसपास मौजूद लोगों ने भी पानी डालकर आग बुझाने में मदद की।
परिवार का कहना है कि आग लगने के तुरंत बाद खुद को पानी से बुझाने की उनकी कोशिश गंभीर स्थिति में जान बचाने में अहम साबित हुई।
घायल हालत में खुद बताया अस्पताल का रास्ता
हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल जिनी ने एक डिलीवरी राइडर से अस्पताल पहुंचाने में मदद मांगी। परिवार के अनुसार, उन्हें रास्ते की जानकारी थी और उन्होंने खुद अस्पताल का रास्ता बताया। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने मेडिकल सहायता के लिए आवाज लगाई और डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
इसके बाद जिनी ने अपने माता-पिता को फोन कर हादसे और अपनी गंभीर स्थिति की जानकारी दी।

अस्पताल में अपनी घाव दिखाती जिनी।
25 से 30% तक गंभीर बर्न, एक सर्जरी हो चुकी
परिवार के अनुसार, जिनी करीब 25 से 30 प्रतिशत तक थर्ड डिग्री बर्न से जूझ रही हैं। चेहरे, बाएं हाथ और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। अब तक एक सर्जरी हो चुकी है और आगे रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
लंबे इलाज, लगातार ड्रेसिंग और सीमित गतिविधियों के कारण वह करीब छह महीने तक काम और कंटेंट क्रिएशन से दूर रह सकती हैं। शारीरिक चोटों के साथ इस दौरान उनके सामने भावनात्मक और मानसिक चुनौती भी बनी हुई है।
हाईकोर्ट की प्रक्रिया के बाद अहमदाबाद पहुंचीं
बेहतर और विशेषज्ञ इलाज के लिए जिनी के परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया। कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद के जायडस अस्पताल लाया गया, जहां उनका इलाज और रिकवरी जारी है।
परिवार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि सड़क पर चल रहे ड्रिलिंग कार्य में प्लानिंग, अनुमति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर लापरवाही हुई हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब लक्ष्य- जिंदगी की ओर वापसी
गैस ब्लास्ट ने जिनी की जिंदगी की रफ्तार जरूर रोक दी, लेकिन उनके सपनों और हौसले को नहीं। करीब दो महीने के इलाज के बाद अब वह धीरे-धीरे भविष्य की ओर देख रही हैं।
रक्षाबंधन पर अस्पताल में भाइयों का साथ और जिनी की मुस्कान इस मुश्किल सफर के बीच उम्मीद की तस्वीर बनी है। उनके लिए यह दिन हादसे की याद से ज्यादा नई जिंदगी की शुरुआत और पहले से मजबूत होकर लौटने के संकल्प का दिन है।

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इंदौर में गैस पाइपलाइन ब्लास्ट का VIDEO

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