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Manimahesh Yatra 2026 | Jammu-Kashmir Pilgrims Arrive in Bharmour


चंबा जिले के भरमौर में जम्मू-कश्मीर से पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था।

उत्तर भारत की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर से शिव भक्तों के जत्थे भरमौर पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में, पहला जत्था आज दोपहर भरमौर के 84 परिसर पहुंचा। यहां पूजा-अर्चना के बाद यह जत्था कल मणिमहेश के लिए रवाना होगा। हर साल सैकड़ों शिव

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इस बार भी श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से आए इन श्रद्धालुओं की यात्रा आस्था और भक्ति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है। कई भक्त भरमौर पहुंचने के बाद मणिमहेश डल झील तक का सफर नंगे पांव तय करते हैं।

कठिन पहाड़ी रास्तों, चढ़ाई और मौसम की चुनौतियों के बावजूद, उनके कदम भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को आराध्य मानते हैं और स्वयं को माता पार्वती के वंशज से जोड़कर देखते हैं। इसी आस्था के चलते वे भगवान शिव को अपना जमाई मानते हैं।

मान्यता है कि सर्दियों के आगमन से पहले भगवान भोलेनाथ को जम्मू-कश्मीर आने का निमंत्रण देने और उन्हें अपने क्षेत्र में आने का आग्रह करने की धार्मिक परंपरा से भी इस यात्रा को जोड़ा जाता है।

‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे लगे

जम्मू-कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं का भरमौर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और अन्य यात्रियों के साथ आत्मीय मिलन भी देखने को मिलता है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालु ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।

भरमौर में बम बम भोले के जयकारे लगाते शिव भक्त।

भरमौर में बम बम भोले के जयकारे लगाते शिव भक्त।

भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था

श्रद्धालुओं का कहना है कि मणिमहेश यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। कठिन रास्ते की हर चुनौती उनके उत्साह को और बढ़ाती है। जम्मू-कश्मीर से पहुंचे इन शिव भक्तों के जत्थों से भरमौर और मणिमहेश यात्रा क्षेत्र का धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया है।



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