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FSSAI Red Label Warning Proposal


नई दिल्ली5 मिनट पहले

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अब खाने-पीने की चीजों के पैकेट पर आपको आपको हैक्सागोनल शेप में लाल रंग का चेतावनी लेबल दिखेगा। इस लेबल का मतलब यह होगा कि पैकेट में जो फूड है, उसमें फैट, शुगर और नमक की मात्रा तय लिमिट से ज्यादा है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश कर इसकी जानकारी दी है। इसका मकसद उपभोक्ताओं को खाने-पीने की उन चीजों के प्रति जागरूक करना है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

सवाल-जवाब में समझते हैं पूरा मामला क्या है और इससे आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा…

सवाल 1: FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में क्या प्रस्ताव दिया है?

जवाब: FSSAI ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है कि वह ज्यादा फैट, ज्यादा चीनी और नमक वाले खाने-पीने की चीजों के पैकेट पर सामने की तरफ एक लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह लेबल लोगों को आसानी से समझ आने वाली चेतावनी देगा।

सवाल 2: यह लाल रंग का वॉर्निंग लेबल दिखने में कैसा होगा?

जवाब: FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, यह वॉर्निंग लेबल लाल रंग के षट्कोण (हेक्सागोनल- 6 कोनों वाला) आकार का होगा। इसे पैकेट के फ्रंट यानी ठीक सामने की तरफ लगाया जाएगा।

सवाल 3: पैकेट पर इस चेतावनी का साइज क्या रखा जाएगा?

जवाब: आम तौर पर न्यूट्रिशन की जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में छिपी होती है, लेकिन FSSAI ने तय किया है कि यह फ्रंट वॉर्निंग लेबल, पैकेट के पीछे छपने वाली न्यूट्रिशन इनफॉर्मेशन टेबल के फॉन्ट साइज से कम से कम ‘1 पॉइंट बड़ा’ होगा, ताकि यह आसानी से दिखाई दे।

सवाल 5: नियमों को तय करने का आधार या पैमाना क्या है?

जवाब: कोई भी फूड प्रोडक्ट हाई फैट, हाई शुगर या हाई साल्ट (HFSS) की श्रेणी में आता है या नहीं, इसका फैसला ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (ICMR-NIN) द्वारा जारी ‘डायट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस, 2024’ के मानकों के आधार पर किया जाएगा।

सवाल 6: सुप्रीम कोर्ट को FSSAI को यह जवाब क्यों देना पड़ा?

जवाब: ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका दायर कर डिब्बा बंद या पैकेट वाले खाने पर अनिवार्य वॉर्निंग लेबल लगाने की मांग की थी। इस मामले की पिछली सुनवाई (13 अगस्त) के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI को नियमों में देरी के लिए फटकार लगाई थी और पूछा था कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें? इसके बाद FSSAI ने यह हलफनामा पेश किया है।

सवाल 7: क्या यह नियम सभी पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स पर एक साथ लागू होगा?

जवाब: नहीं, FSSAI ने इसे अलग-अलग फेज में लागू करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि इंडस्ट्री को अपने प्रोडक्ट्स को सुधारने का मौका मिले।

फेज 1: पहले चरण में उन प्रोडक्ट्स पर लाल लेबल लगेगा, जिनमें फैट, शुगर या साल्ट में से कोई भी ‘दो या दो से अधिक’ चीजें तय सीमा से ज्यादा होंगी। इसमें सभी अधिक मीठी कोल्ड ड्रिंक्स भी शामिल होंगी।

फेज 2: दूसरे चरण में यह नियम उन प्रोडक्ट्स पर भी लागू हो जाएगा, जिनमें इनमें से कोई ‘एक’ चीज भी ज्यादा मात्रा में होगी।

सवाल 8: क्या कुछ खाद्य पदार्थों को इस लाल लेबल से छूट भी मिली है?

जवाब: हां, कुछ चुनिंदा कैटगरी को इससे बाहर रखने का प्रस्ताव है। सिंगल-इंग्रीडिएंट (सिर्फ एक सामग्री वाले) प्रोडक्ट्स और ऐसे पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से ही फैट, शुगर या नमक से भरपूर होते हैं, उन्हें छूट मिलेगी। उदाहरण के लिए शुद्ध घी, खाद्य तेल, साधारण नमक, चीनी, गुड़ और शहद को इस फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग से छूट दी जाएगी।

सवाल 9: FSSAI के मुताबिक इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा किसे होगा?

जवाब: FSSAI ने कोर्ट को बताया है कि इस उपभोक्ता-अनुकूल लेबलिंग व्यवस्था से लोग जागरूक होकर भोजन का चुनाव कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा बच्चों और समाज के संवेदनशील या कमजोर वर्गों को होगा, जो अनजाने में अत्यधिक अस्वस्थ चीजें खा लेते हैं।

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