सोमवार को रिटायरमेंट के दिन एसई गीतूराम तंवर का शव डीएवी स्कूल के पास खड़ी उनकी कार में मिला था। इसमें एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें उन्होंने बिजली निगम के कई अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
हरियाणा के करनाल बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर सुसाइड केस ने तूल पकड़ लिया है। परिवार ने सोमवार को 12 घंटे बाद पोस्टमॉर्टम तो करा दिया, लेकिन एफआईआर में उन 12 अफसरों के नाम शामिल नहीं करने तक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया है
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मृतक के भाई सुरेश तंवर का कहना है कि जब तक सुसाइड नोट में शामिल एक-एक अफसर की गिरफ्तारी नहीं हो जाती और टर्मिनेशन नहीं कर दिया जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा-
क्या दलित समाज में जन्म लेकर हमने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया। आगे कोई भी दलित न तो अपने बेटे को पढ़ाएगा और न ही कोई अफसर बनाएगा। जैसे आईपीएस वाई पूरण कुमार केस में हुआ, मेरे भाई गीतूराम तंवर ने भी उसी तरह सुसाइड जैसा कदम उठाया । मेरे भाई ने आईजी सोनीपत को शिकायत दी, एमडी को शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

‘जाट-झोट्टा जहां मिलेगा, वहीं लट्ठ मारुंगा‘ वाले वीडियो पर चार माह से सस्पेंड चल रहे गीतू राम तंवर का 31 अगस्त को रिटायरमेंट भी था। पत्नी और बेटियों को घर से वे यह कहकर निकल थे कि “अपनी आखिरी चिट्ठी देकर आता हूं”। इसके बाद उनका शव डीएवी स्कूल के पास कार में पड़ा मिला था। सुसाइड नोट में उन्होंने चार महीने में डेटवाइज 28 पत्र शासन-प्रशासन को लिखने जिक्र किया था।
सस्पेंड होने से लेकर सुसाइड तक चार माह में तंवर क्या-क्या किया, 12 अफसरों पर क्या-क्या आरोप, परिवार क्यों इसे आईपीएस पूरन कुमार से केस से जोड़ रहा और पुलिस ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की? पढ़े पूरी रिपोर्ट…

एसई गीतू राम तंवर की बेटियों ने कहा कि पापा ने कुछ भी गलत नहीं बोला था, लेकिन वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
बेटियां बोलीं- पापा से हंसी-मजाक में कुछ बातें बुलवा लीं
“कुछ महीने पहले पापा का एक वीडियो वायरल हुआ था। असल में हुआ यह था कि कुछ लोग जान-बूझकर पापा के साथ बैठे औरसी-मजाक में उनसे कुछ बातें बुलवा लीं, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि पापा उस पद पर रहें। पापा ने कुछ भी गलत नहीं बोला था, लेकिन उन लोगों ने वीडियो को अलग-अलग जगह से काटकर एडिट किया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
इसके बाद, न्यूज़ चैनल पर आकर पापा ने सार्वजनिक रूप से माफी भी माँगी थी, लेकिन विभाग ने उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड हुए एक-दो महीने बीत गए, पापा ने एमडी और सीएम तक हर जगह लेटर लिखे कि ‘मेरे साथ गलत हो रहा है, मुझे बिना वजह इतना अपमानित किया जा रहा है।’ विभाग ने एक दिखावे की (नकली) जांच कमेटी बनाई, जिसमें पापा वीडियो कॉल पर अपनी बात रखते रहे, लेकिन कमेटी वालों ने उनकी एक न सुनी।”
“पापा ने अपने पत्र में साफ-साफ 4 लोगों के नाम लिखे हैं- रणवीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयल और प्रदीप कुमार। पापा ने अपनी पूरी जिंदगी कानून और नियमों का पालन किया है। उन्होंने जाने से पहले हमसे यही कहा है कि हमें न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी है। हम चाहते हैं कि इन जिम्मेदार लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।”
भाई बोला-पुलिस डरी हुई, एफआईआर में 12 घंटे लगाए
गीतू राम तंवर के भाई सुरेश कुमार ने कहा कि जब सोमवार को हम एफआईआर करवाने के लिए गए तो बोला गया कि हमारा सिस्टम नहीं चल रहा। शाम को साढ़े 6 बजे इन लोगों ने हमें आधी अधूरी एफआईआर दी है, जिसमें आरोपियाें के भी नामजद भी नहीं है।
सुसाइड नोट भी हमने शिकायत के साथ पुलिस को दी, लेकिन उसके बाद भी एफआईआर दर्ज करने में इतना टाइम क्यों लगाया? 12 घंटे के बाद पोस्टमार्टम हुआ है। पुलिस आखिर किससे डरी हुई है। एक अफसर के साथ इतना बड़ा हादसा हुआ और पोस्टमार्टम के लिए इतना ज्यादा टाइम लगा दिया। हम प्रशासन से यह चाहते है कि जो भी दोषी है, उनको जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और कोर्ट में पेश किया, ताकि हमें न्याय मिले।
अब सस्पेंशन से लेकर सुसाइड तक की कहानी…

करीब चार माह पहले एसई गीतूराम तंवर का यह वीडियो डीसी कैंप ऑफिस में बनाया गया था। इसमें वे जाट समाज पर टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं।
साजिश के तहत फर्जी वीडियो बनाए, सस्पेंशन हुआ : गीतू राम तंवर ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि सोनीपत सर्कल के अधिकारियों इंजीनियर रणबीर देशवाल और इंजीनियर अश्विनी कौशिक ने एक फर्जी और एडिटेड (डॉक्टर्ड) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराया, ताकि मुझे उकसाया जा सके और शांति भंग हो। विवाद से बचने के लिए मैंने 02/04/26 को माफी मांगी, लेकिन उसी दिन मुझे सस्पेंड कर दिया गया। 3 महीने बाद मिली चार्जशीट का आधार पूछने पर आरटीआई से पता चला कि इसके पीछे कोई जांच रिपोर्ट ही मौजूद नहीं थी।
27 से ज्यादा शिकायतें, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं : मैंने 19 फरवरी 25 से लेकर 26 अगस्त 2026 तक 27 से भी ज्यादा बार पत्र लिखकर एमडी कार्यालय से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस (FIR नंबर 90), आरटीआई और आयोग तक गुहार लगाई। मेरे बार-बार कहने के बावजूद वायरल वीडियो की कोई फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई, उल्टे पुलिस अधिकारियों द्वारा मुझ पर दबाव बनाया गया। मेरा पक्ष तक दर्ज नहीं किया गया।
8.37 करोड़ रुपये की शिकायत का भी जिक्र : तंवर ने रणबीर देशवाल की 21 फरवरी 2025 की उस शिकायत का भी जिक्र किया, जिसमें टीडीआई द्वारा 8.37 करोड़ रुपये वापस किए जाने का मामला उठाया गया था। उनका आरोप था कि जांच अधिकारी को सबूत देने के बजाय देशवाल ने एक साल से अधिक समय बाद 1 अप्रैल को मीडिया में खबर प्रकाशित कराई। तंवर के अनुसार इस मामले की जांच हो चुकी थी और मुख्य अभियंता रोहतक ने बीती 23 जून को रिपोर्ट दे दी थी।
जातिगत भेदभाव और राजनीतिक संरक्षण के आरोप : आरोपी अधिकारी रणबीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, सतीश गोयत, प्रदीप कुमार अनुसूचित जाति का बॉस स्वीकार नहीं करते थे। उन्होंने हमेशा सत्ताधारी दल के नेता मोहन लाल बड़ौली से संबंध और अपने प्रभाव का धौंस दिखाया। वहीं, सामान्य वर्ग के अन्य अधिकारियों मोहित भटनागर और अजय कोहर के वीडियो सामने आने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये वीडियो बीती 9 अगस्त और 17 अगस्त को एमडी कार्यालय में जमा किए गए थे।
IPS वाई पूरन कुमार केस जैसा खतरा, सुसाइड किया : सेवानिवृत्ति यानी 31 अगस्त, 2026 के दिन तक न तो मुझे बहाल किया गया और न ही रिटायरमेंट ऑर्डर जारी हुए, जिससे मेरे पेंशन लाभ रोक दिए गए। मैंने पत्रों में साफ जताया था कि जानबूझकर की जा रही इस अनदेखी के कारण मेरे साथ कोई गंभीर घटना घट सकती है, जैसा कि दिवंगत वाइंजीनियर पूरन कुमार (IPS) के मामले में हुआ था। यदि मुझे या मेरे परिवार को कुछ होता है, तो यही अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इसके बाद उनका शव डीएवी स्कूल के पास कार में पड़ा मिला।

एसई गीतू राम तंवर के सुसाइड के बाद फैमिली को संभालती उनकी बेटी।
अब जानिए किस अधिकारी पर क्या आरोप
- रणबीर देशवाल: तंवर ने आरोप लगाया कि रणबीर देशवाल ने 22 जनवरी को उनके खिलाफ शिकायत की। उसी दिन शिकायत सक्षम प्राधिकारी के सामने रखकर बर्खास्तगी, पेंशन और ग्रेच्युटी जब्त करने जैसी कार्रवाई की सिफारिश कर दी गई, जबकि उनकी रिपोर्टिंग अधिकारी की राय नहीं ली गई और उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। तंवर ने वीडियो तैयार करने में भी देशवाल की भूमिका होने की आशंका जताई।
- अश्विनी कौशिक: तंवर ने आरोप लगाया कि कौशिक ने वीडियो तैयार करने में भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि कौशिक अपने पिता के नाम पर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और निजी मोबाइल नंबर से आर्थिक लेनदेन करते हैं। आरोप लगाया कि कौशिक खुद को भाजपा नेता मोहन लाल बडोली का रिश्तेदार बताते रहे हैं। उधर, दैनिक भास्कर से बातचीत में अश्विनी कौशिक ने कहा कि तंवर से उनका कोई विवाद नहीं था। उन्होंने केवल इसलिए शिकायत की थी क्योंकि तंवर उन्हें गलत बोलते थे। जब उनसे पूछा गया कि साजिशकर्ता के रूप में भी उनका नाम है तो कौशिक ने कहा कि इसमें तो सभी के नाम लिखे हुए हैं।
- सतीश गोयत और प्रदीप कुमार: तंवर ने दोनों पर रणबीर देशवाल और अश्विनी कौशिक के साथ मिलकर उनके खिलाफ घटनाक्रम तैयार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चारों अधिकारियों ने तत्कालीन एसई प्रशासन मनिंदर सिंह और मोहित भटनागर के साथ मिलकर बदले की भावना से कार्रवाई कराई।
- मनिंदर सिंह और मोहित भटनागर: तंवर ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई में दोनों की भूमिका रही। उनका दावा था कि मनिंदर सिंह के एसई प्रशासन के कार्यकाल में उन्हें कम समय में छह चार्जशीट/कारण बताओ नोटिस मिले, जबकि 15 साल की नौकरी में पहले कभी इतनी कार्रवाई नहीं हुई थी।
- धर्म सुहाग: तंवर ने आरोप लगाया कि सोनीपत सर्किल के लिंक अधिकारी इंजीनियर धर्म सुहाग ने उनके खिलाफ गुप्त तरीके से चार्जशीट तैयार कर पानीपत सर्किल के माध्यम से मुख्य अभियंता प्रशासन को भेजी और निर्धारित रिपोर्टिंग चैनल यानी मुख्य अभियंता रोहतक को दरकिनार किया।
- राज सिंह, रूपेश और आशीष मेहल: तंवर ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने सामने आकर भूमिका नहीं निभाई, लेकिन जातिगत कारणों से पर्दे के पीछे से दूसरे अधिकारियों को समर्थन दिया।

सस्पेंडेड एसई गीतू राम तंवर का शव मिलने के बाद जांच करती हुई पुलिस।
एसएचओ बोले-परिवार की शिकायत के आधार केस दर्ज किया
सेक्टर 32,33 थाना के एसएचओ कृष्ण कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम करवा दिया है। परिजनों ने शिकायत दी है, उसके आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले में हर पहलू पर गहनता से जांच कर रही है। परिजनों को प्रशासन द्वारा समझाने का प्रयास भी जारी है।
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