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कोंडागांव में वन अधिकार जमीन का सीमांकन कराने पहुंचे ग्रामीण:ग्रामीण बोले- जंगल बचेंगे तो पीढ़ियों की आजीविका सुरक्षित रहेगी,संयुक्त जांच से खत्म होगा विवाद




कोंडागांव जिले के मारागांव क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन अधिकार पत्र के तहत मिली भूमि के वास्तविक सीमांकन और जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल उनकी पीढ़ियों की आजीविका का आधार है, इसलिए वन अधिकार देने के साथ जंगल की सुरक्षा भी जरूरी है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से वन कक्ष क्रमांक RF/104 और RF/102 में वन अधिकार पत्रधारियों की भूमि की राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम से मौके पर जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कुछ हितग्राही पट्टे में दर्ज भूमि की सीमा से बाहर जाकर जंगल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बोले- पट्टे की सीमा स्पष्ट हो, जंगल भी बचे ग्रामीण कमल बिहारी धुर्वे ने कहा कि बस्तर के जंगल ग्रामीणों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पत्रधारियों को उनकी जमीन का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन पट्टे की निर्धारित सीमा से बाहर जाकर जंगल को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष सीमांकन होने से भूमि विवाद खत्म होंगे और जंगल भी सुरक्षित रहेंगे। इससे आने वाली पीढ़ियों की आजीविका को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। संयुक्त सीमांकन से स्पष्ट होगी जमीन की स्थिति ग्रामीण बमगत राम नेताम ने सरकार और प्रशासन से उनकी शिकायत को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पत्रधारियों की जमीन का संयुक्त सीमांकन कराया जाना चाहिए, ताकि जितनी भूमि का अधिकार मिला है, उतने ही हिस्से की सीमा स्पष्ट और सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रशासन के साथ मिलकर जंगल बचाने के लिए तैयार हैं। सरकार को वन संरक्षण की मजबूत व्यवस्था बनाने के साथ ग्रामीणों को भी संरक्षण प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहिए।



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