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Kerala High Court: Muslim Personal Law Does Not Exempt POCSO Crimes


तिरुवनंतपुरम46 मिनट पहले

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केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 17 साल की लड़की से रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ केस रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंध उसे कार्रवाई से नहीं बचा सकता।

जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने 19 अगस्त 2026 के आदेश में यह टिप्पणी की। आरोपी का दावा था कि नाबालिग पीड़ित उसकी कानूनी पत्नी है। उनकी शादी मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई थी।

आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 375 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) एक्ट, 2012 के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट ने कहा कि लड़की की उम्र 18 साल से कम थी, इसलिए मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुई शादी भी उसे POCSO के तहत दोषी होने से नहीं बचाएगी।

कोर्ट बोला- पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध थी या नहीं, इसका असर नहीं पड़ता

कोर्ट ने कहा, “अगर यह मान भी लें कि मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों और रस्मों के अनुसार शादी हुई थी, तब भी यह आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी खत्म नहीं करती। खासकर इसलिए, क्योंकि शादी और शारीरिक संबंध बनाए जाने के समय लड़की 17 साल की थी।”

कोर्ट ने आगे कहा कि POCSO एक्ट के प्रावधान तब लागू होते हैं, जब शादी में शामिल कोई एक पक्ष नाबालिग हो। इस पर पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध थी या नहीं, इसका असर नहीं पड़ता।

POCSO एक्ट की धारा 2(1)(d) में 18 साल से कम उम्र के किसी भी शख्स को बच्चा बताया गया है। कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की से यौन संबंध POCSO एक्ट के तहत अपराध है।

ऐसी स्थिति में बच्ची आरोपी की पत्नी है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोप POCSO एक्ट के तहत अपराध बनाने के लिए जरूरी तथ्यों को पूरा करते हैं।

अक्टूबर 2021 में लड़की को घर ले जाने का आरोप

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी 23 अक्टूबर 2021 को नाबालिग लड़की को अपने घर ले गया था। आरोप है कि उसी रात और उसके बाद अगले 4 दिनों तक उसने लड़की से जबरन संबंध बनाए।

यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी के माता-पिता ने अपराध को अंजाम देने में उसकी मदद की। इसके बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और उसने केस रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

आरोपी ने दावा किया कि उसने 23 जुलाई 2021 को लड़की से शादी की थी। उस समय लड़की की उम्र 17 साल 1 महीने थी। उसने कहा कि शादी इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों परिवारों के सदस्यों की मौजूदगी में हुई थी।

शादी की वैधता का फैसला ट्रायल में होगा

कोर्ट ने कहा कि शादी होने का दावा साबित करने वाला कोई दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है। शादी वैध थी या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि आरोपों और सबूतों के आधार पर अपराध सामने आते हैं। इसलिए FIR, फाइनल रिपोर्ट और आगे की आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी।

आरोपी की ओर से एडवोकेट सनी मैथ्यू और अनूज जे पेश हुए। नाबालिग पीड़िता की ओर से एडवोकेट पी जयराम ने पैरवी की। राज्य की ओर से सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नवास वीए पेश हुए।



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