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बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत के मामले के बाद आदिवासी संगठनों ने कल बालाघाट बंद का आह्वान किया है। इस मुद्दे पर मेडिकल एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की अलग-अलग राय सामने आई है। गुरुवार शाम दोनों संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपना रुख साफ किया। मेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेश सोनी ने बालाघाट बंद का समर्थन करते हुए बताया कि दोपहर तक जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। एसोसिएशन के संभागीय उपाध्यक्ष प्रियंक वर्मा ने बच्चों की मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नेताओं के दबाव में स्वास्थ्य कर्मचारियों के तबादले किए गए और बीमारी फैलने के बाद जुलाई में डॉक्टर्स की भर्ती की गई। सुरेश सोनी ने सवाल उठाया कि जब छिंदवाड़ा में जहरीले सिरप मामले में दुकानदार पर तुरंत कार्रवाई हुई, तो बालाघाट में अब तक जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई? IMA ने किया डॉक्टर्स का बचाव दूसरी ओर, IMA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बी.एम. शरणागत ने बच्चों की मौत पर डॉक्टर्स का बचाव किया है। उन्होंने मृतक बच्चों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि पूरा स्वास्थ्य अमला प्रशासन के निर्देशों पर ही काम करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया बेवजह डॉक्टर्स को दोषी ठहरा रहा है, जबकि पूरा काम प्रशासन के आदेश पर होता है। हालांकि, IMA उन डॉक्टर्स के नाम नहीं बता सका जिन पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल आदिवासी संगठन सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप की जिम्मेदारी तय करने और उन पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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बच्चों की मौत पर बालाघाट बंद रहेगा:मेडिकल एसोसिएशन ने कहा- अब तक जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई? IMA ने किया डॉक्टर्स का बचाव
