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राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में इस बार तीन या अधिक संतान होने पर इलेक्शन लड़ने पर रोक नहीं थी। इसके बावजूद उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस की ओर से घोषित उम्मीदवारों में ऐसा कोई प्रत्याशी सामने नहीं आया है, जिसकी तीसरी या उससे अधिक संतान हो। अधिकांश प्रत्याशियों के दो बच्चे हैं। पहले दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित होती थी। इससे कई संभावित दावेदार चुनावी राजनीति से बाहर हो जाते थे। अब यह बाध्यता समाप्त होने से ऐसे लोगों के लिए भी स्थानीय चुनाव का रास्ता खुल गया है। नए चेहरों को मिली जगह इधर, उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने कई नए चेहरों पर दांव लगाया है। दोनों पार्टियों की सूचियों में पहली बार चुनाव मैदान में उतर रहे कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों को जगह मिली है। ऐसे में इस बार का निगम चुनाव पुराने चेहरों के साथ नए उम्मीदवारों की राजनीतिक परीक्षा का चुनाव भी माना जा रहा है। जो उम्मीदवार मैदान में हैं, उनमें से कई कुंवारों को भी मौका मिला है। हालांकि इनकी संख्या अभी साफ नहीं हो सकी है। सबसे खास बात यह है कि दोनों दलों में जिन युवा चेहरों को मैदान में उतारा वे पूरी तरह से चुनाव प्रचार में उतर गए हैं। ये उम्मीदवार सोशल मीडिया पर भी पूरी ताकत के साथ अपने विजन को शेयर कर रहे हैं।
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उदयपुर- 2 से ज्यादा बच्चे वाला एक भी उम्मीदवार नहीं:इसी साल कानून में मिली थी छूट; कुंवारों और नए चेहरों को मौका मिला
