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मनवाड़ा में 22 साल पुरानी पुलिया टूटी:श्मशान घाट का रास्ता जोखिम भरा, 25 लाख का प्रस्ताव अटका




बड़वानी जिले की ग्राम पंचायत मनवाड़ा में ग्रामीणों को श्मशान घाट और अन्य स्थानों तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। यहां 22 साल पुरानी एक पुलिया पूरी तरह से टूट चुकी है। ग्रामीणों ने इसके निर्माण के लिए कई बार मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई है। लगभग डेढ़ साल पहले, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी के कहने पर पंचायत ने 25 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, यह राशि अब तक स्वीकृत नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी यह कहकर प्रस्ताव को टाल देते हैं कि गांव तक पहुंचने के लिए हाईवे से पक्का रास्ता पहले से मौजूद है। इस समस्या से मनवाड़ा सहित पांच गांवों के 500 से अधिक विद्यार्थी और हजारों ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत मनवाड़ा की जनसंख्या 5232 है, जो अंजड़-ठीकरी हाईवे से जुड़ी है और जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव की साक्षरता दर 60 प्रतिशत है। ग्रामीण भागीरथ पटेल ने बताया कि यह पुलिया 22 साल पुरानी है और कई बार टूट चुकी है। पंचायत द्वारा केवल मरम्मत कर मुरूम डालने का काम किया जाता है, जो बारिश का पानी आने पर बह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 20-22 सालों से केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। श्मशान घाट और बोर चिंदी जाने के लिए लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। एक अन्य ग्रामीण देवीसिंह राणा के अनुसार, यह पुलिया निहाली और कुंडी नदी के संगम पर स्थित है और रियासत कालीन है। यह अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। ग्रामीण अक्सर शॉर्टकट के लिए इसी पुलिया का उपयोग करते हैं। साल के आठ महीने तक इससे आवाजाही संभव होती है, लेकिन बारिश के मौसम में यह पूरी तरह बह जाती है, जिससे आवागमन खतरनाक हो जाता है। ग्राम पंचायत सरपंच किरण वास्कले ने बताया कि पुलिया का स्थान पहले डूब क्षेत्र में बताया गया था, लेकिन बाद में इसे डूब क्षेत्र से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इस संबंध में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से बड़वानी में मुलाकात कर एक पत्र भी सौंपा था। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने स्टीमेट भी बनाया था। जल्द ही सर्वे कर पुलिया का निर्माण किया जाएगा। मंडवाड़ा में नहाली व कुठी नदी के संगम पर करीब 22 साल पहले बाढ़ में टूटी पुलिया आज भी प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार है। इस साल आई बाढ़ में रपट पर डाली मुरम पूरी तरह बह गई, जिसके बाद पंचायत ने सुरक्षा की दृष्टि से इस मार्ग पर आवाजाही बंद कर दी। इससे बेड़ीपुरा के 2500 से अधिक ग्रामीणों और स्कूली विद्यार्थियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों को अपने ही मूल गांव, जहां राशन दुकान, बैंक, प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकंडरी स्कूल हैं, पहुंचने के लिए अब अंजड़-ठीकरी हाईवे के बड़े पुल से होकर करीब ढाई किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। जबकि पुराने मार्ग से दूरी महज आधा किमी है। ग्रामीणों ने बताया हर बारिश में रपट की मुरम बह जाने पर पंचायत पिछले दो दशकों से 50 से 60 हजार रुपए खर्च कर 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली मुरम डलवाकर अस्थायी रास्ता बनाती है। इन 20 सालों में इस अस्थायी मरम्मत पर हुए खर्च को जोड़ा जाए तो यहां पक्की पुलिया बनाई जा सकती थी। पंचायत के पास पुलिया बनाने की एक साथ इतना बजट नहीं है। रोज अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं। तीन साल पहले नदी पार करते समय चार छात्राएं बही थी लेकिन उन्हें बचा लिया था, लेकिन एक युवक की बहने से मौत हो गई थी।



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