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अमित शाह की बैठक टलने से मेयर का कार्यकाल अटका:फैसला अगले महीने; चंडीगढ़ में लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव




चंडीगढ़ के भविष्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर फैसला एक बार फिर टल गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शनिवार को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद थी। अब बैठक अगले महीने होने की संभावना जताई जा रही है। बैठक टलने के कारण चंडीगढ़ से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर फैसला नहीं हो सका। इनमें मास्टर प्लान-2031 में बदलाव, पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक देना, लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करना तथा मेयर का कार्यकाल बढ़ाना शामिल है। इन मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण इनकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। बैठक दूसरी बार टलने से शहर के लोगों और संबंधित वर्गों की उम्मीदों को भी झटका लगा है। मास्टर प्लान में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में बदलाव को लेकर प्रशासन की ओर से कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में FAR बढ़ाकर 3.0 करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा चुनिंदा क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति देने और औद्योगिक प्लॉटों के विभाजन की अनुमति देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। प्रशासन का मानना है कि इन बदलावों से शहर में उपलब्ध जमीन और संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। खासतौर पर फ्रीहोल्ड से जुड़ा प्रस्ताव मंजूर होने पर करोड़ों रुपये की संपत्तियों को लेकर मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है। लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां लीजहोल्ड आधार पर हैं। इन्हें फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय के सामने रखा जाना है। फ्रीहोल्ड होने के बाद संपत्ति मालिकों को संपत्ति के इस्तेमाल और हस्तांतरण में ज्यादा अधिकार मिल सकेंगे। इसी वजह से इस प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजरें भी केंद्र के फैसले पर टिकी हैं। बैठक में पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। लंबे समय से इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग मालिकाना हक की मांग करते रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि केंद्र से मंजूरी मिलती है तो हजारों परिवारों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। मेयर का कार्यकाल भी अहम मुद्दा चंडीगढ़ के मेयर के कार्यकाल को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण फैसला होना है। मेयर का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर ढाई साल करने का प्रस्ताव है। कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नजर बनी हुई है। इन प्रस्तावों पर चर्चा और फैसला करने के लिए इससे पहले भी बैठक प्रस्तावित की गई थी, लेकिन वह भी स्थगित हो गई थी। अब दूसरी बार बैठक टलने के कारण लंबे समय से लंबित मामलों पर फैसला और आगे खिसक गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने बात रखेगा प्रशासन प्रशासन इन सभी प्रस्तावों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने अपनी बात रखेगा। अब उम्मीद है कि अगले महीने होने वाली बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होगी और कुछ प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।



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