- Hindi News
- Business
- Adani Defence & IRRPL Sign Deal For AK 203 Rifle Ammo Production In India
4 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

भारतीय सेना अब मेड-इन-इंडिया गोलियां ही इस्तेमाल करेगी। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इंडो-रशियन राइफल्स (IRRPL) ने आज शनिवार को 5 साल के लिए एक डील की है।
इसके तहत अडाणी डिफेंस भारतीय सेना की AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए 7.62mm साइज की गोलियां बनाकर सप्लाई करेगी।
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सेना को गोलियों के लिए अब किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और भारत में ही लगातार कारतूस मिलते रहेंगे।
भारत-रूस समझौते के बाद बनी कंपनी
IRRPL की स्थापना 2019 में भारत और रूस के बीच हुए अंतर-सरकारी समझौते के बाद हुई थी। इसका मकसद भारतीय सशस्त्र बलों के लिए AK-203 असॉल्ट राइफल बनाना है।
कंपनी की राइफल बनाने वाली यूनिट उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में है। इसके संयुक्त उपक्रम में भारतीय कंपनियां एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड शामिल हैं।
रूस की कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी इस संयुक्त उपक्रम का हिस्सा हैं।
6,01,427 AK-203 राइफल बनाने का करार
रक्षा मंत्रालय ने भारत में AK-203 राइफलों के उत्पादन की जिम्मेदारी IRRPL को दी है। दिसंबर 2021 में सरकार ने कोरवा यूनिट में 6,01,427 AK-203 राइफल बनाने के लिए कंपनी को करार दिया था।
कंपनी के मुताबिक, नया गोला-बारूद समझौता इस कार्यक्रम के घरेलू उत्पादन नेटवर्क को और मजबूत करेगा। इसके तहत भारत में बनी AK-203 राइफल और देश में तैयार किया गया गोला-बारूद एक ही सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा होंगे।
अडाणी डिफेन्स की कानपुर में भी यूनिट
अडाणी डिफेन्स ने भारत में छोटे कैलिबर का गोला-बारूद बनाने की क्षमता तैयार की है। इसमें कानपुर की उसकी यूनिट भी शामिल है।
कंपनी के मुताबिक, नया करार देश में छोटे हथियारों से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन की घरेलू क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाली सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को भी बढ़ावा मिलेगा।
विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घटाने की कोशिश
इस समझौते से भारत-रूस रक्षा कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादन का स्तर और बढ़ेगा। यह कार्यक्रम शुरुआत में भारत में AK-203 राइफल बनाने पर केंद्रित था।
अब इसमें देश में बना गोला-बारूद भी शामिल हो गया है। इससे हथियार प्रणाली के एक जरूरी हिस्से के लिए विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता कम होगी।
कंपनी ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपने घरेलू रक्षा उत्पादन आधार का विस्तार कर रहा है और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है।
कंपनी के अनुसार, राइफल और उसके गोला-बारूद, दोनों की सप्लाई भारत से होने से AK-203 कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादन का स्तर और बढ़ेगा।

