नई दिल्ली6 मिनट पहले
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हादसा रविवार को हुई। 27 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
दिल्ली के ढह चुके ‘हॉस्टल डेज’ में रहने वाले छात्रों से तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया लिया जाता था। इसके बावजूद एग्रीमेंट में हॉस्टल प्रबंधन ने हादसे या किसी नुकसान की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया था। हादसे में हॉस्टल के 7 छात्रों की मौत हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑनलाइन वायरल हो रहे रेंट एग्रीमेंट में लिखा है, “पीजी अथॉरिटी छात्र को होने वाली किसी भी कैजुअल्टी या जोखिम के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगी।”
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक एक कमरे का मंथली रेंट ₹15 हजार रुपये था।
एग्रीमेंट की शर्तों से पता चलता है कि छात्रों पर कई सख्त नियम लागू थे। वहीं, उनकी सुरक्षा को लेकर हॉस्टल की जिम्मेदारी तय नहीं की गई थी। मामले की हाईकोर्ट जांच के आदेश के बाद हॉस्टल में छात्रों की सुरक्षा और दिल्ली में चल रहे ऐसे पीजी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

एग्रीमेंट में छात्रों पर कई शर्तें
हॉस्टल डेज के रेंट एग्रीमेंट में छात्रों से तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया देने को कहा गया था। इसमें लिखा था कि एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने से पहले किसी भी स्थिति में सिक्योरिटी वापस नहीं की जाएगी।
फर्नीचर या दूसरी चीजों को नुकसान पहुंचने पर उसकी कीमत सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटने की बात भी कही गई थी। छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर लगाने से भी रोका गया था।
अगर कोई छात्र तय अवधि पूरी होने से पहले हॉस्टल छोड़ता है, तो उसे हॉस्टल फीस या सिक्योरिटी वापस नहीं मिलनी थी। यह नियम अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत छात्र को निकाले जाने की स्थिति में भी लागू था।

गिरने से पहले बिल्डिंग की तस्वीर।
पांच मंजिला इमारत में दो मंजिल की अनुमति थी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुातबिक, एक MCD अधिकारी के अनुसार, यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और करीब 55 गज जमीन पर बनी थी।
यह जमीन एक रिहायशी कॉलोनी में थी, जहां केवल दो मंजिला इमारत बनाने की अनुमति थी। अधिकारी के अनुसार, इस इमारत का कोई बिल्डिंग प्लान भी मंजूर नहीं हुआ था।
ढहने के वक्त बेसमेंट में काम चल रहा था
रिपोर्ट के अनुसार, इमारत गिरने के समय निर्माण का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। बेसमेंट में मजदूर काम कर रहे थे। बचाए गए 11 लोगों में से 2 मजदूर थे। इनमें से 1 मजदूर की हादसे में मौत हो गई।
हादसे में कुल 7 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में हॉस्टल में रहने वाले लोग शामिल थे। घटना में घायल या बचाए गए बाकी लोगों की पूरी जानकारी इस कॉपी में नहीं दी गई है।
3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1133 घटनाएं
2022 से 2025 तक यानी 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के 1133 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में 98 लोगों की मौत हुई है।

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