Headlines

मृत व्यक्ति को लर्निंग लाइसेंस जारी होने पर हाईकोर्ट सख्त:केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब, आधार से DL जारी करने की व्यवस्था को चुनौती




इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह जवाब एक मृत व्यक्ति के आधार नंबर का इस्तेमाल कर लर्निंग लाइसेंस जारी होने के दावे पर मांगा गया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अगर ऐसा DL (ड्राइविंग लाइसेंस) जारी हुआ है, तो ऑनलाइन सिस्टम में यह कैसे संभव हुआ। इस सवाल पर सरकार की ओर से अभी तक कोई साफ जवाब नहीं दिया जा सका है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की बेंच ने यह आदेश संतोष मिश्रा की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में आधार कार्ड के आधार पर लर्निंग और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था को चुनौती दी गई है। इसमें केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 11 और आधार वेरिफिकेशन से जुड़े नियमों को भी चुनौती दी गई है। कोर्ट ने नियम 11 के मामले में अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। आधार कार्ड उम्र का सही प्रमाण नहीं याचिका में कहा गया है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधार में दर्ज जानकारी का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि, आधार कार्ड उम्र का सही प्रमाण नहीं है। ऐसे में सिर्फ आधार जानकारी के आधार पर लाइसेंस जारी करने से कम उम्र के लोगों को भी लाइसेंस मिलने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दस्तावेज पेश कर दावा किया कि एक मृत व्यक्ति के आधार नंबर का इस्तेमाल कर उसके नाम से लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया गया। एक और उदाहरण देते हुए बताया गया कि आधार जानकारी के साथ अश्लील तस्वीरें ऑनलाइन अपलोड होने के बावजूद लर्निंग लाइसेंस जारी हो गया। याचिकाकर्ता ने इसे व्यवस्था की कमी बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा है। सरकार ने याचिका में लगाए गए आरोपों का विरोध किया। सरकार ने कहा कि सिर्फ आधार नंबर देने से लाइसेंस अपने आप जारी नहीं होता। लाइसेंस के लिए दूसरी औपचारिकताएं भी पूरी करनी पड़ती हैं। हालांकि, मृत व्यक्ति के नाम लाइसेंस जारी होने के दावे पर कोर्ट के सवाल का सरकार की ओर से कोई साफ जवाब नहीं दिया जा सका। मामले की अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद होगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *