गुरप्रीत सेखों को आम आदमी पार्टी में शामिल करते हुए सीएम भगवंत मान ।
पूर्व गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद पंजाब की सियासत गरमा गई है। फिरोजपुर के मखू में सीएम भगवंत मान की मौजूदगी में सेखों को AAP में शामिल कराया गया।
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सेखों पर 47 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और वह 2016 के चर्चित नाभा जेलब्रेक केस का प्रमुख आरोपी रहा है। उनकी जॉइनिंग पर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने सवाल उठाते हुए AAP पर गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने कहा कि भगवंत मान कभी अकाली दल में गैंगस्टरों की एंट्री का विरोध करते थे, लेकिन अब खुद वही रास्ता अपना रहे हैं। अकाली दल ने सेखों की जॉइनिंग को लेकर AAP की गैंगस्टरों के प्रति नीति पर सवाल उठाए।

6 सितंबर को गुरप्रीत सिंह सेखों ने फिरोजपुर के मखू में सीएम भगवंत मान की मौजूदगी में AAP जॉइन की।
वड़िंग बोले- सत्ता के लालच में आसान रास्ता चुना
कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने सीएम भगवंत मान पर निशाना साधते हुए सेखों की AAP में एंट्री पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मान सरकार का यह कदम पंजाब की राजनीति के लिए गंभीर संकेत है।
वडिंग ने कहा कि
सीएम भगवंत मान, जो कभी शिरोमणि अकाली दल में गैंगस्टरों की एंट्री का विरोध करते थे, आज खुद वही रास्ता अपना रहे हैं। शर्म की बात है कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी दोनों पंजाब की राजनीति को गैंगस्टरों का अखाड़ा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। पंजाब को अमन-शांति, रोजगार और विकास चाहिए, गैंगस्टरों वाली राजनीति नहीं। लेकिन लगता है कि बदलाव ने सत्ता के लालच में आसान रास्ता चुन लिया है।

अकाली दल ने AAP पर गैंगस्टरों के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि अगर गैंगस्टरों के प्रति यही AAP की नीति है, तो पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पार्टी ने कहा कि जिस सेखों का नाम नाभा जेलब्रेक जैसे हाईप्रोफाइल मामले से जुड़ा रहा, उसे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद पार्टी में शामिल क्यों कराया?
भाजपा बोली- क्या गैंगस्टर चलाएंगे पंजाब
पंजाब भाजपा ने CM भगवंत मान को घेरते हुए कहा कि पूर्व गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। फिरोजपुर के मखू में सीएम मान ने गुरप्रीत सेखों की जॉइनिंग करवाई। मान साहब, जनता का आपको एक ही सवाल- क्या अब गैंगस्टर चलाएंगे पंजाब की सियासत?

पहले भी गैंगस्टर से राजनीति में आए
फरीदकोट के चांदभान गांव के प्रभजिंदर सिंह बराड़ उर्फ डिम्पी चांदभान को पंजाब का पहला बड़ा डॉन माना जाता था। उनके शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) से संबंध थे। चुनाव रद्द होने और उग्रवाद के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद वह उत्तर प्रदेश चले गए, जहां उनके मुख्तार अंसारी जैसे लोगों से संबंध बने। 2006 में चंडीगढ़ के लेक क्लब के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
डिम्पी के सहयोगी रहे जसविंदर सिंह भुल्लर उर्फ रॉकी ने 2012 में फाजिल्का से निर्दलीय चुनाव लड़ा और भाजपा के सुरजीत कुमार ज्यानी से 1,700 से कम वोटों से हार गए। 2016 में परवानू के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी बहन राजदीप कौर ने 2017 में फाजिल्का से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 38 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए। 2018 में वह SAD में शामिल हो गईं।
40 से ज्यादा आपराधिक मामलों में वांछित गैंगस्टर जयपाल भुल्लर 2021 में कोलकाता में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। उनके पिता हरपाल भुल्लर ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में नाम वापस ले लिया। वहीं, जेल में बंद गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया की मौसी राजविंदर कौर डेरा बाबा नानक ब्लॉक समिति की चेयरपर्सन हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुकी हैं
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