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लुधियाना में हवाला नेटवर्क का बढ़ता जाल:विदेशों से जुड़े तार, बड़े खिलाड़ी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर




लुधियाना में हवाला नेटवर्क एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पिछले कई वर्षों में हवाला के बड़े नेटवर्क का खुलासा कर चुकी हैं और कई ऑपरेटरों को गिरफ्तार भी किया गया है। इसके बावजूद शहर में हवाला का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा। जांच में बार-बार सामने आ रहा है कि इस नेटवर्क के तार विदेशों के साथ-साथ देश के दूसरे राज्यों से जुड़े हैं। पुलिस की कार्रवाई में छोटे ऑपरेटर और पैसे पहुंचाने वाले लोग तो पकड़े जाते हैं, लेकिन नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। यही वजह है कि एक नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद दूसरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। मई 2026 तक 132 गिरफ्तार, हर महीने करीब 35 करोड़ की कमाई मई 2026 में लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट ने शहर में अब तक के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क में से एक का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने 132 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें लुधियाना के तीन हवाला ऑपरेटर भी शामिल थे। जांच में सामने आया था कि आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों को पॉप-अप स्कैम, रिमोट एक्सेस और फर्जी बैंक सिक्योरिटी अलर्ट के जरिए निशाना बनाते थे। नेटवर्क के कुछ सदस्य यूरोप और उत्तरी अमेरिका से जुड़े थे, जबकि इसके मुख्य खिलाड़ी दिल्ली और गुजरात से ऑपरेशन चला रहे थे। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क की कमाई करीब 35 करोड़ रुपए प्रति माह थी। इसमें से लगभग 40 फीसदी रकम हवाला के जरिए भारत पहुंचाई जाती थी। लुधियाना के मिलरगंज में सक्रिय तीन हवाला ऑपरेटर इस रकम को आगे दिल्ली और गुजरात में बैठे मुख्य आरोपियों तक पहुंचाते थे। पुलिस ने इस मामले में करीब 300 बैंक खाते फ्रीज किए थे। इनमें ज्यादातर म्यूल अकाउंट थे और इन खातों में 16 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम थी। जून 2026: एक महीने बाद दूसरा हवाला नेटवर्क पकड़ा मई की कार्रवाई के ठीक एक महीने बाद जून में पुलिस ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे एक और अवैध मनी ट्रांसफर नेटवर्क का खुलासा किया। इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि नेटवर्क के हवाला ऑपरेटरों के संपर्क विदेशों और देश के दूसरे हिस्सों में मौजूद लोगों से थे। कुछ आरोपियों ने हवाला ट्रांजैक्शन के लिए फर्जी फर्म तक बना रखी थीं। इन फर्मों के जरिए डुप्लीकेट रसीदें जारी की जाती थीं। इतना ही नहीं, रकम ट्रांसफर करने के लिए शहर के लोगों के आधार कार्ड का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। यानी हवाला नेटवर्क सिर्फ कैश के लेन-देन तक सीमित नहीं था, बल्कि फर्जी दस्तावेज, फर्जी फर्म और म्यूल अकाउंट के जरिए पूरी समानांतर व्यवस्था खड़ी की गई थी। अगस्त 2026 में ISI के लिए भी हवाला चैनल का इस्तेमाल लुधियाना में हवाला नेटवर्क का एक और गंभीर पहलू अगस्त 2026 में सामने आया, जब पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित जासूसी मामले में 20 वर्षीय रशपाल सिंह को गिरफ्तार किया। गुरदासपुर के सराफकोट निवासी रशपाल ने कथित तौर पर ISI के कहने पर फिरोजपुर रोड पर एक दुकान किराए पर ली थी। यह जगह बड्ढोवाल स्थित सेना के डिपो से करीब छह किलोमीटर दूर थी। पुलिस जांच के अनुसार राशपाल को करीब 3 से 4 लाख रुपए दुबई से संचालित हवाला चैनल के जरिए उपलब्ध कराए गए थे। उसके दोस्त रोहित मसीह और वरिंदर मसीह को भी कथित तौर पर ISI ने अपने नेटवर्क में शामिल किया था और उन्हें भी हवाला ऑपरेटरों के जरिए रकम मिली थी। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ISI ने पंजाब में अपने लोगों तक पैसे पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया। इस मामले में अब भी उस हवाला चैनल की पहचान की जांच चल रही है, जो दुबई के जरिए पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलरों के निर्देश पर संचालित हो रहा था। IPL सट्टेबाजी में भी हवाला का इस्तेमाल लुधियाना में हवाला का नेटवर्क क्रिकेट सट्टेबाजी से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। शहर में IPL के दौरान सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क सक्रिय होने की शिकायतें और पुलिस कार्रवाई सामने आती रही हैं। जांच में सामने आया है कि सट्टेबाजी से जुड़े लोग विदेशों में बैठे लोगों के संपर्क में रहते हैं और रकम भेजने तथा हासिल करने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस ने IPL सट्टेबाजी से जुड़े सिंडिकेट के लिए काम करने वाले दो कथित कूरियर को भी गिरफ्तार किया था। आरोप था कि दोनों म्यूल बैंक खातों का इंतजाम करते थे। इन खातों के जरिए सट्टेबाजी की रकम और हवाला का पैसा आगे पहुंचाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि गरीब और जरूरतमंद लोगों से 10 से 20 हजार रुपए देकर उनके बैंक खाते लिए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपए के लेन-देन को घुमाने के लिए किया जाता था। हालांकि, इन मामलों में भी पुलिस की कार्रवाई मुख्य तौर पर कूरियर और छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों तक ही सीमित रही और नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों तक जांच नहीं पहुंच सकी। 2012 में DRI ने पकड़ा था 1,000 करोड़ का हवाला नेटवर्क लुधियाना में हवाला का नेटवर्क कोई नया मामला नहीं है। साल 2012 में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने शहर में करीब 1,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े हवाला नेटवर्क का खुलासा किया था। मामला तब सामने आया जब लुधियाना के एक एक्सपोर्टर पर कथित तौर पर बढ़े हुए बिल दिखाकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ड्यूटी ड्रॉबैक योजना का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। इसके जरिए करीब 60 करोड़ रुपए के इंसेंटिव हासिल किए गए थे। यह मामला बताता है कि लुधियाना में हवाला का नेटवर्क वर्षों से कारोबार, फर्जी बिलिंग और दूसरे वित्तीय लेन-देन के जरिए चलता रहा है। ‘लाखों से हजारों करोड़ तक पहुंच गया हवाला का कारोबार’ पूर्व ED के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने 2013 से 2017 के बीच मनी लॉन्ड्रिंग और NDPS एक्ट से जुड़े मामलों की जांच का नेतृत्व किया था, के मुताबिक कुछ दशक पहले हवाला का कारोबार लाखों रुपए तक सीमित था, लेकिन अब यह हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। उनका कहना है कि वर्ष 2000 से पहले FERA के तहत कार्रवाई के प्रावधान काफी सख्त थे। बाद में FEMA लागू हुआ, जिसके तहत हवाला और विदेशी मुद्रा उल्लंघनों को मुख्य रूप से सिविल प्रकृति का माना जाता है। पूर्व अधिकारी के मुताबिक FEMA के तहत एजेंसी के पास सीधे गिरफ्तारी की शक्ति नहीं है। उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक जुर्माना और संपत्ति जब्ती जैसे प्रावधान हैं। उनका कहना है कि पहले कई मामलों में COFEPOSA का इस्तेमाल कर आरोपियों को हिरासत में रखा जाता था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल हर मामले में नहीं होता। ‘हवाला को प्राथमिकता नहीं मिलने से बढ़ रही समस्या’ अधिकारी के मुताबिक हवाला को जिस स्तर पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल रही। उनके अनुसार हवाला का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक चलती रहती है। पुलिस की भूमिका क्या है? पूर्व ED अधिकारी के मुताबिक, अगर पुलिस किसी हवाला नेटवर्क को पकड़ती है तो वह मामले की जानकारी ED को दे सकती है। हवाला से जुड़े बड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है। अब सवाल बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचने का लुधियाना में पिछले कुछ महीनों में हवाला से जुड़े कई नेटवर्क सामने आने के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन नेटवर्क के पीछे बैठे बड़े खिलाड़ियों तक जांच कब पहुंचेगी? म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले, पैसा पहुंचाने वाले कूरियर और छोटे ऑपरेटर गिरफ्तार होते रहे हैं। लेकिन हवाला की रकम को विदेश से भारत लाने, यहां से दूसरे राज्यों में भेजने और पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले लोगों की पहचान और गिरफ्तारी अब भी जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि कार्रवाई के बावजूद लुधियाना में हवाला नेटवर्क का सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा।



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