Headlines

मोहाली में डकैती की साजिश में फैसला:BSF के दो जवानों समेत 4 बरी, गैंगस्टर गोंडर के साथी को 1 साल की सजा, दो भगोड़े




दस साल पुराने 2015 के एक हाई-प्रोफाइल मामले में मोहाली अदालत ने फैसला सुनाते हुए BSF के दो जवानों अनिल और प्रेम सिंह समेत तीन आरोपियों को डकैती की साजिश रचने और अन्य आरोपों से बरी कर दिया, जबकि गैंगस्टर गिरोह से जुड़े जतिंदर सिंह उर्फ जिंदी को अवैध हथियार रखने के जुर्म में दोषी ठहराते हुए 1 साल की सजा सुनाई है। अदालत में पुलिस डकैती की कहानी को साबित नहीं कर पाई।
दो पाइंटों में जानिए पुलिस की कहानी कैसे पड़ी कमजोर डकैती की योजना का सबूत नहीं
पुलिस का दावा था कि 1 सितंबर 2015 को गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी हथियारों के साथ डकैती की योजना बना रहे थे। लेकिन उस दिन पुलिस ने किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। आरोपी दिसंबर 2015 में पकड़े गए। अदालत ने माना कि 1 सितंबर 2015 को डकैती की योजना बनाने का कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है। पाकिस्तान से तस्करी के आरोप भी साबित नहीं हुए
पुलिस ने BSF जवान प्रेम सिंह और अनिल पर पाकिस्तान से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया था, लेकिन अदालत में इसके समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। दोनों के कब्जे से कोई अवैध हथियार, गोला-बारूद या नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ। पुलिस ऐसा कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सकी, जिससे दोनों का अन्य आरोपियों से संपर्क या साजिश में शामिल होना साबित हो। अदालत के सामने पुलिस की पूरी थ्योरी मुख्य रूप से सह-आरोपियों के बयानों पर आधारित थी, जिसकी स्वतंत्र सबूत से पुष्टि नहीं हो सकी। अब इस मामले की कहानी को सिलेसिलेवार जानिए विक्की गोंडर की अगुवाई में गैंगस्टर डकैती की तैयारी में 1 सितंबर 2015 की शाम सीआईए स्टाफ मोहाली की पुलिस टीम देशू माजरा (चंडीगढ़-खरड़ रोड) के पास गश्त पर थी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि प्रसिद्ध गैंगस्टर जयपाल सिंह, तिरथ सिंह, हरजिंदर सिंह उर्फ विक्की गोंडर, गुरजंत सिंह उर्फ भोलू, संदीप सिंह और रछपाल सिंह का एक गिरोह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद लेकर आया है। ये लोग मोहाली में केएफसी (KFC) रेस्टोरेंट के पास मौजूद थे और किसी बड़ी वारदात/डकैती को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने सूचना के आधार पर FIR नंबर 119 दर्ज कर छापेमारी की, लेकिन उस दिन कोई भी आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आया।
पुलिस ने दो लोगों को हथियारों समेत दबोचा
29 दिसंबर 2015 को पुलिस को सूचना मिली कि गुरजंत सिंह उर्फ भोलू और संदीप सिंह सफेद स्विफ्ट कार (PB-02-CE-5786) में खरड़ के लांडरां रोड पर घूम रहे हैं। पुलिस ने ट्रेंड्स सैलून के बाहर दोनों को घेरने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी और हाथापाई की, जिसमें एक पुलिसकर्मी की वर्दी फट गई। पुलिस ने दोनों को मौके पर पकड़ लिया। गुरजंट सिंह के पास से .9 एमएम जिगाना पिस्तौल और 20 कारतूस, जबकि संदीप सिंह से .30 बोर पिस्तौल और 35 कारतूस बरामद हुए। जिस कार में वे सवार थे, उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी और वह लुधियाना से छीनी गई थी।
पूछताछ में खुलासे और BSF जवानों का नाम पूछताछ में आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया। 31 दिसंबर 2015 को पुलिस ने जालंधर कैंट पुल के पास से जतिंदर सिंह उर्फ जिंदी को गिरफ्तार किया। उसके पास से .30 बोर की पिस्तौल और 28 कारतूस बरामद हुए। इसके बाद गुरजंत भोलू और संदीप सिंह के सनी एन्क्लेव, खरड़ स्थित किराए के मकान नंबर 7-B से स्टेन गन, एयर गन, सैकड़ों जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अपहरण की साजिश से जुड़ी एक डायरी बरामद की गई। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि BSF के दो जवान अनिल कुमार, जो श्रीगंगानगर में तैनात था, और प्रेम सिंह भी गिरोह में शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों पर पाकिस्तान सीमा पार से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी कर गैंगस्टरों तक पहुंचाने का आरोप था। इसके बाद पुलिस ने BSF से अनुमति लेकर दोनों जवानों को भी गिरफ्तार कर लिया। केस के दो आरोपी भगोड़े घोषित किए गए मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी गुरजंट सिंह उर्फ भोलू को 2025 में और संदीप सिंह को 2026 में लगातार कोर्ट में गैर-हाजिर रहने पर भगोड़ा घोषित कर दिया गया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *