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कीरखेडा में घायल हालत में मिले एक वानर को सिविल डिफेंस टीम ने समय पर रेस्क्यू कर उसकी जान बचाने की कोशिश की। शनिवार को बाढ़ नियंत्रण कक्ष के कंट्रोल रूम पर फोन से सूचना मिली कि कीरखेडा इलाके में एक वानर कई दिनों से घायल हालत में पड़ा है। सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने देखा कि वानर के पैर में गंभीर चोट थी और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। इसके बाद उसे सावधानी से वहां से निकालकर इलाज के लिए सरकारी पशु हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। इलाज के बाद वन विभाग से संपर्क किया गया और वानर को आगे की देखभाल के लिए सेमलपुरा स्थित वन विभाग की नर्सरी में मौजूद कर्मचारियों को सौंप दिया गया। 5-6 दिन पहले करंट लगने की आशंका सिविल डिफेंस टीम के कैलाश वैष्णव ने बताया- वानर की हालत देखकर माना जा रहा है कि वह करीब पांच-छह दिन पहले बिजली के करंट की चपेट में आया होगा। करंट लगने से उसका एक पैर बुरी तरह घायल हो गया। इसी वजह से वह चलने-फिरने में भी परेशानी महसूस कर रहा था। हालांकि यह सिर्फ शुरुआती आशंका है। समय पर सूचना मिलने से उसे इलाज मिल सका और अब उसकी देखभाल वन विभाग की निगरानी में की जाएगी। रेस्क्यू के बाद वन विभाग को सौंपा इलाज के बाद सिविल डिफेंस टीम ने वन विभाग से संपर्क किया। इसके बाद घायल वानर को सेमलपुरा स्थित वन विभाग की नर्सरी में मौजूद कर्मचारी के सुपुर्द कर दिया गया। अब वहां उसकी देखभाल की जाएगी। वन विभाग की निगरानी में उसके स्वस्थ होने तक जरूरी इलाज और देखरेख की जाएगी। टीम के सदस्यों ने बताया कि ऐसे मामलों में लोगों की ओर से समय पर सूचना मिलना सबसे जरूरी होता है। इससे घायल वन्य जीवों को जल्दी राहत मिल जाती है और उनकी जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इन लोगों ने किया रेस्क्यू में सहयोग घायल वानर के रेस्क्यू और उसे सुरक्षित इलाज तक पहुंचाने में अजय सिंह राठौड़, टीचर जगपाल सिंह राणावत और सिविल डिफेंस टीम के कैलाश चंद्र वैष्णव, नारायण कीर, मंगनीराम भोई, चैनराम भोई, राधेश्याम भोई, किशन भोई, अंकित मेघवाल, धर्मराज जाट और बबूल भोई मौजूद रहे। सभी ने मिलकर वानर को सुरक्षित तरीके से उठाया और इलाज के बाद वन विभाग तक पहुंचाने में सहयोग किया।
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घायल वानर का इलाज कर वन विभाग को सौंपा:करंट लगने की आशंका, सिविल डिफेंस टीम ने रेस्क्यू कर जान बचाई
