बसपा सुप्रीमो मायावती के परिवार में विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को मायावती ने कहा कि पार्टी में मेरे दोनों भतीजों आकाश और ईशान को राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। भविष्य में भतीजों के बच्चों को भी कोई पद नहीं मिलेगा।
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अगर भाई आनंद कुमार को मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद (मायावती की भतीजी) की मदद ले सकते हैं। उनकी ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता के आधार पर भविष्य में उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। मायावती ने कहा कि कांशीराम की तरह मैं भी परिवारवाद के खिलाफ डटी रहूंगी। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

अपने भाइयों आकाश (दाएं) और ईशान के साथ दीपिका आनंद। यह रक्षाबंधन की तस्वीर है।
आकाश से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जेन-जी का दांव चला
आकाश आनंद के निष्कासन से होने वाले संभावित नुकसान की काट के लिए मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनावों में जेन-जी को 50% तक टिकट देने की बात कही। मायावती ने कहा कि यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ, युवा और योग्य चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी।
मायावती ने कहा- नई पीढ़ी के जरिए देश में अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को तेजी से मजबूत करना BSP का लक्ष्य होगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों के साथ युवा वर्ग को प्राथमिकता देने की अपील की। इसमें महिला और पुरुष दोनों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही।
बेटी तैयार नहीं हुई, तो दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देंगे
मायावती ने साफ किया कि अगर दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो भाई आनंद पार्टी की आम सहमति से दलित समाज के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। लेकिन, उनके बेटों और आगे उनकी संतानों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

तस्वीर 23 जून, 2024 की है, जब लखनऊ में बसपा की एक बैठक में आकाश आनंद ने मायावती के पैर छुए थे।
‘अगर मैं महिला नहीं होती, तो भाई को भी साथ नहीं रखती’
मायावती ने कहा- अगर मैं महिला नहीं होती, तो अपने भाई-बहनों को भी अपने साथ नहीं रखती। महिला होने के कारण सुरक्षा और अन्य परेशानियों से बचने व सम्मान के साथ पार्टी में काम करने के लिए मुझे अपने सबसे छोटे भाई आनंद को अपने साथ रखना पड़ा। हालांकि, अब भाई के परिवार के सदस्यों को लेकर बन रही परिस्थितियों के बावजूद मैं किसी तरह के मोह में नहीं पड़ूंगी। पार्टी को नुकसान नहीं होने दूंगी।
‘कांशीराम की तरह मैं भी परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं’
मायावती ने खुद को कांशीराम की राजनीतिक विरासत से जोड़ा। कहा- जिस तरह कांशीराम परिवारवाद से दूर रहे, उसी तरह मैं भी इस सिद्धांत पर कायम हूं। BSP में किसी एक व्यक्ति को उसकी योग्यता के आधार पर मौका दिया जा सकता है। लेकिन, उसकी आड़ में उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक फायदा नहीं दिया जाएगा।
इसका मकसद BSP को परिवारवाद से मुक्त रखना और सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ना है।

ईशान आनंद (दाएं से पहले) 3 सितंबर को बसपा की बैठक में पहुंचे थे।
2027 के लिए जेन-जी और जेन-अल्फा पर फोकस
मायावती ने पार्टी संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ विधानसभा चुनावों में भी युवा चेहरों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। इसमें खासतौर पर Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरतों को राजनीति के केंद्र में रखने की बात कही गई है।
उन्होंने BSP सरकारों के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, शहरी और ग्रामीण विकास के साथ युवाओं की जरूरतों पर भी काम किया गया।
मायावती ने दावा किया कि BSP सरकारों में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ। इस कारण मजबूरी में होने वाला पलायन भी काफी हद तक रुका।

2012 में सत्ता में नहीं लौटने का ठीकरा विरोधियों पर फोड़ा
मायावती ने 2012 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। कहा कि विरोधी दलों के कथित जातिवादी रवैए के कारण BSP 2012 में 5वीं बार सरकार नहीं बना सकी। इसका पछतावा आज भी सर्वसमाज के लोगों को है।
BSP सरकार के बाद प्रदेश में ‘कानून द्वारा कानून का राज’ कायम नहीं हो सका। लोगों का जीवन परेशानियों से भरा है। मायावती ने विकास के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सरकारी ढिंढोरा पीटने से लोगों का पेट नहीं भरता।
सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा से सावधान रहने की नसीहत दी
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों, संगठनों और मीडिया-सोशल मीडिया में चलने वाले प्रोपेगेंडा से सावधान रहने को कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि BSP को यूपी में सरकार बनाने से रोकने के लिए साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपनाए जा सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरे तन-मन-धन से अंबेडकरवादी मिशन में जुटे रहने की अपील की।

निष्कासित नेताओं की वापसी की खबर को बताया ‘फेक न्यूज’
मायावती ने पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को भी खारिज किया। कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह प्रचार किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किए गए लोगों को BSP में वापस लिया जाएगा। ऐसे लोगों को BSP में वापस नहीं लिया जाएगा।
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