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उज्जैन के रामघाट पर शनिवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में हस्त नक्षत्र की मौजूदगी में सामवेदी ब्राह्मणों ने साल में केवल एक बार होने वाला विशेष उपाकर्म संस्कार किया और नया यज्ञोपवीत धारण किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोपहर में शुरू हुआ यह विधान दोपहर 12:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक चला। उपाकर्म की शुरुआत शरीर की शुद्धी और सालभर में जाने-अनजाने में हुए दोषों के प्रायश्चित और मुक्ति के लिए स्नान से हुई। इसके बाद भगवान विष्णु का पूजन किया गया। देव, ऋषि, पितृ और दिव्य मनुष्य तर्पण के साथ शंख-शालिग्राम पूजन किया गया। सप्तऋषि, गणपति, अरुंधति, गोभिलाचार्य और प्रवर का भी विधिवत पूजन किया गया। उपाकर्म की पद्धति आचार्य पंडित अवधेश त्रिवेदी, उपाचार्य पंडित दुष्यंत त्रिवेदी और पंडित उत्कर्ष जोशी ने मिलकर संपन्न कराई। इस अवसर पर सामवेदी ब्राह्मणों के परंपरागत परिवार मौजूद रहे। ज्योतिषी पंडित अमन डब्बावाला ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सामवेदी ब्राह्मणों का उपाकर्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में हस्त नक्षत्र के दौरान किया जाता है। यह विशेष पूजा और धार्मिक विधान साल में सिर्फ एक बार होता है। मान्यता है कि दोपहर के सूर्य की मौजूदगी में किए जाने वाले इस उपाकर्म से जाने-अनजाने दोषों के प्रायश्चित की प्रक्रिया पूरी होती है।
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उज्जैन में सामवेदी ब्राह्मणों ने किया विशेष उपाकर्म संस्कार:साल में एक बार होने वाला यह विधान 6 घंटे चला, धारण किया नूतन यज्ञोपवीत
