दुर्ग-भिलाई10 मिनट पहले
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दुर्ग के अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू कराने के नाम पर 12 लाख 39 हजार 483 रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताया। पहले कॉलेज के ईमेल पर परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा। इसके बाद कॉलेज का मुआयना कराने के लिए एक व्यक्ति को भेजा गया। भरोसा होने के बाद अलग-अलग काम के नाम पर कॉलेज से कई बार रुपए जमा कराए गए। जब रुपए लेने के बाद संपर्क बंद हो गया, तब कॉलेज प्रबंधन को ठगी का पता चला।

दुर्ग के अंडा में स्थित कॉलेज में एग्जाम सेंटर खोलने के नाम पर हुई है ठगी।
मामले में शैल देवी महाविद्यालय के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे की शिकायत पर नेवई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने पहली नजर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।
12 अप्रैल को आया था पहला मेल राजन कुमार दुबे ने पुलिस को बताया कि 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ईमेल पर एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की उससे लगातार बातचीत होने लगी।
17 अप्रैल को भेजा समझौता पत्र प्रस्ताव के बाद 17 अप्रैल को कॉलेज के ईमेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया। अगले दिन कॉलेज के भौतिक मुआयने के लिए बुल आई नाम की संस्था से एक व्यक्ति के आने की जानकारी दी गई। 18 अप्रैल को ए.के. साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा। उसने कॉलेज की बिल्डिंग की तस्वीरें लीं और पूरे परिसर का मुआयना किया। जाते समय उसने जांच की रिपोर्ट भेजने की बात कही। 1 मई को दोपहर 3 बजे से 3.15 बजे तक कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की एक जूम बैठक हुई। इसमें एचसीएल टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत हुई। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से जुड़े कागज कॉलेज के ईमेल पर भेजे गए। कॉलेज ने 8 मई को उन पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए।
पहले उपकरण के नाम पर 5.98 लाख रुपए लिए 19 मई को कॉलेज को परीक्षा सेंटर के उपकरण के लिए 5 लाख 98 हजार 743 रुपए का बिल भेजा गया। इसमें एक निजी फर्म का खाता दिया गया। कॉलेज ने 21 मई को अपने बैंक खाते से इस रकम का भुगतान कर दिया। डीजी सेट के नाम पर 3.42 लाख और इसके बाद 23 मई को 58.5 केवी डीजी सेट के लिए 3 लाख 42 हजार 200 रुपए की मांग की गई। कॉलेज ने 26 मई को यह रकम भी उसी खाते में जमा कर दी। इस तरह दो बार में कॉलेज से 9 लाख 40 हजार 943 रुपए लिए जा चुके थे।
सामान भेजने के नाम पर फिर मांगे 2.98 लाख 11 जून को कॉलेज को सामान भेजने और बीमा के नाम पर दो अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया। परिवहन के नाम पर 1 लाख 35 हजार 700 रुपए और बीमा के नाम पर 1 लाख 62 हजार 840 रुपए मांगे गए। कॉलेज ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इन दोनों भुगतानों को मिलाकर 2 लाख 98 हजार 540 रुपए और जमा किए गए।
15 जून के बाद बंद हो गया मोबाइल शिकायत के मुताबिक पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन 12 अप्रैल से 14 जून तक वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति से लगातार बातचीत करता रहा। 15 जून के बाद संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया। ईमेल का जवाब भी आना बंद हो गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन को शक हुआ कि वह ठगी का शिकार हो गया है। ठगी का पता चलने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दो शिकायत नंबर भी दिए गए हैं। अब नेवई पुलिस पूरे मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

