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फतेहपुर के महठगा निवासी सुमित सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले में पुलिस की जांच में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने माना है कि सुमित का दिव्यांग प्रमाणपत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से ही जारी हुआ था। हालांकि, दिव्यांगता ठीक होने के बाद भी उसने प्रमाणपत्र के आधार पर पेंशन का लाभ लिया, जिसकी शिकायत पर पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक शशांक कुमार ने 10 सितंबर को एक FIR दर्ज कराई थी। इसमें फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर पेंशन लेने का आरोप है। FIR में अर्जुन सिंह के साथ सुमित सिंह और उसकी पत्नी सुनीता पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। जांच के दौरान पुलिस ने सुमित सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338 जोड़ी है। यह धारा दस्तावेजों में जालसाजी से संबंधित आरोपों के लिए है। पूछताछ में सुमित ने पुलिस को बताया कि उसने 2021 में एक दुर्घटना में चोट लगने के बाद दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाया था और फिर दिव्यांग पेंशन लेना शुरू किया। मेडिकल और शारीरिक परीक्षण पुलिस के मुताबिक, दिव्यांगता ठीक होने के बाद भी सुमित ने दोबारा मेडिकल और शारीरिक परीक्षण नहीं कराया और लगातार पेंशन लेता रहा। सीएमओ कार्यालय ने भी दिव्यांग प्रमाणपत्र के संबंध में पुलिस को रिपोर्ट दी है। अब पुलिस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और उसके आधार पर पेंशन लेने के पूरे मामले की जांच कर रही है। बताया गया है कि आरोपी सुमित सिंह के खिलाफ पिछले तीन सालों में एससी-एसटी, पॉक्सो, मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी सहित आठ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। कोतवाली प्रभारी हेमंत मिश्रा ने सोमवार को बताया कि मामले की जांच चल रही है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दिव्यांगता ठीक होने के बाद भी लेते रहा पेंशन:फतेहपुर में सीएमओ कार्यालय से जारी हुआ था प्रमाणपत्र
