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वाराणसी में अगले 4 दिनों तक तेज धूप का अलर्ट:गंगा घाट पर जमे सिल्ट से पर्यटक परेशान,84 घाटों का संपर्क अभी भी टूटा




काशी में मंगलवार सुबह तेज धूप के साथ उमस भरे मौसम का असर देखने को मिला। सुबह से ही आसमान साफ रहा और तेज धूप निकली हुई है। वाराणसी में तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हवा की रफ्तार करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे रही। वातावरण में नमी का स्तर 62 प्रतिशत बना हुआ है। मौसम में फिलहाल भारी बारिश के आसार नहीं हैं, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की परिस्थितियां बन सकती हैं। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसूनी ट्रफ लाइन के एक बार फिर उत्तर की ओर खिसकने के संकेत मिल रहे हैं। इसके प्रभाव से अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के तराई, मध्यांचल और पूर्वी जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि वाराणसी में फिलहाल तेज बारिश की कोई स्थिति नहीं बन रही है। गंगा का जलस्तर घटा, घाटों पर बढ़ी मुश्किल दूसरी ओर, वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। पानी घटने के बाद अब घाटों पर नई परेशानी सामने आ गई है। जलस्तर कम होने के साथ ही बड़ी मात्रा में सिल्ट और गीली मिट्टी घाटों के किनारे जमा हो गई है। इसके चलते श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गंगा में स्नान करने में दिक्कत हो रही है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से घाटों की तत्काल सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल मजदूरों के सहारे सिल्ट हटाने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में जरूरत वाले स्थानों पर पंप और अन्य मशीनें लगाकर मिट्टी और गाद को हटाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। 84 घाटों का संपर्क अब भी टूटा गंगा का पानी भले ही लगातार कम हो रहा हो, लेकिन बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अभी भी 84 घाटों का संपर्क टूटा हुआ है। कई घाटों पर पानी और सिल्ट के कारण सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यदि अगले एक सप्ताह तक गंगा के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी नहीं होती है तो पानी और नीचे जाएगा और धीरे-धीरे घाटों से संपर्क बहाल होने लगेगा। मणिकर्णिका पर छत तो हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद काशी के प्रमुख श्मशान घाटों पर बाढ़ का असर अब भी दिखाई दे रहा है। मणिकर्णिका घाट पर अभी भी छत पर शवदाह किया जा रहा है। वहीं हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह की व्यवस्था चल रही है।



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