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बीजेपी से अनिल और कांग्रेस से नगेंद्र ने की दोवदारी:सभापति के लिए रोचक हुआ मुकाबला, बीजेपी 33, कांग्रेस 23 और निर्दलीय की 4 सीटें




चित्तौड़गढ़ नगर परिषद सभापति चुनाव को लेकर बुधवार को शहर की राजनीति में दिनभर गतिविधियां तेज रही। नगर परिषद चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद बीजेपी के सामने सभापति पद के लिए चेहरे का चयन सबसे बड़ा फैसला था। पार्टी ने सुबह सभापति पद के लिए तीन पार्षदों के नामांकन करवाकर अपनी रणनीति का संकेत दिया, लेकिन दोपहर में पार्टी ने वार्ड नंबर 15 के पार्षद अनिल ईनाणी के नाम पर अंतिम फैसला करते हुए उन्हें अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी वार्ड नंबर 36 से निर्वाचित पार्षद नगेंद्र सिंह राठौड़ को मैदान में उतारकर मुकाबले को एकतरफा नहीं रहने दिया। अब सभापति चुनाव में संख्या बल के साथ-साथ पार्षदों के समर्थन और राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नजर रहेगी। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद चुनाव में बीजेपी ने 33 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें और निर्दलीयों के खाते में 4 सीटें गई हैं। बीजेपी ने सुबह तीन नामों के साथ दाखिल किए थे आवेदन सभापति चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन बीजेपी की ओर से सुबह तीन पार्षदों ने अपनी दावेदारी पेश की। वार्ड नंबर 15 के पार्षद अनिल ईनाणी, वार्ड नंबर 31 के पार्षद सुदर्शन रामपुरिया और वार्ड नंबर 25 के पार्षद शैलेंद्र झंवर ने नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर राज लक्ष्मी गहलोत के सामने नामांकन दाखिल किया। तीनों नेताओं के साथ बड़ी संख्या में बीजेपी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। इस दौरान पार्टी ने संगठन की एकजुटता दिखाने की कोशिश की। हालांकि तीन नाम सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई थी कि बीजेपी किस चेहरे को अंतिम रूप देगी और किस आधार पर फैसला होगा। दोपहर में अनिल ईनाणी को मिला पार्टी का सिंबल सुबह नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर में बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मनारायण जोशी नगर परिषद पहुंचे और अनिल ईनाणी के नाम पर पार्टी का सिंबल देकर उन्हें अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया। इसके बाद सभापति चुनाव को लेकर तस्वीर साफ हो गई। अनिल ईनाणी वार्ड नंबर 15 से निर्वाचित पार्षद हैं। पार्टी की ओर से पहले तीन नाम सामने आने और बाद में एक नाम पर अंतिम फैसला होने को लेकर दिनभर राजनीतिक चर्चाएं भी चलती रहीं। हालांकि बीजेपी नेताओं ने इसे पार्टी की चुनावी प्रक्रिया और रणनीति का हिस्सा बताया। धर्मनारायण जोशी बोले- सभी से चर्चा के बाद लिया फैसला बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मनारायण जोशी ने कहा कि अनिल ईनाणी का चयन पार्टी ने सभी स्तरों पर चर्चा के बाद किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व, सांसद सीपी जोशी, विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, जिला संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं से राय लेने के बाद नाम तय किया गया है। उन्होंने कहा कि अनिल ईनाणी पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि प्रत्याशी चयन में कोई व्यक्तिगत समीकरण या जातिगत आधार नहीं रहा है, बल्कि पार्टी ने सभी की सलाह के बाद निर्णय लिया है। धर्मनारायण जोशी ने सुबह तीन नामांकन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि तीन नामांकन करवाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा था और अंतिम निर्णय पार्टी को ही लेना था। उन्होंने किसी भी तरह की नाराजगी से इनकार करते हुए कहा कि बीजेपी में कोई विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता की इच्छा होती है कि उसे जिम्मेदारी मिले, लेकिन पार्टी का फैसला सभी के लिए स्वीकार होता है। उन्होंने दावा किया कि सभी पार्षद बीजेपी प्रत्याशी के साथ हैं और पार्टी मजबूत स्थिति में है। बीजेपी नेताओं की मौजूदगी से दिया एकजुटता का संदेश अनिल ईनाणी के नामांकन के दौरान बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसमें नगर परिषद चुनाव प्रभारी धर्मनारायण जोशी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अशोक रायका, महामंत्री हर्षवर्धन रुद, रघु शर्मा, बीजेपी नेता विजयप्रकाश विप्लवी, नगर मंडल अध्यक्ष गौरव त्यागी, चंदेरिया मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष सुरेश गाडरी, भदेसर मंडल अध्यक्ष हीरालाल रायका, पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष नरेंद्र पोखरना और पूर्व उपसभापति भारत जागेटिया सहित कई नेता शामिल रहे। पार्टी नेताओं की मौजूदगी के जरिए बीजेपी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सभापति चुनाव को लेकर संगठन एकजुट है और सभी नेता पार्टी के फैसले के साथ हैं। कांग्रेस ने नागेंद्र सिंह राठौड़ को बनाया प्रत्याशी वहीं कांग्रेस ने सभापति चुनाव में बीजेपी को चुनौती देने के लिए वार्ड नंबर 36 से जीते पार्षद नागेंद्र सिंह राठौड़ को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस प्रत्याशी ने भी नामांकन दाखिल किया। इस दौरान पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रेम प्रकाश मूंदड़ा सहित पार्टी के कई नेता मौजूद रहे। कांग्रेस ने एक ही नाम के साथ मैदान में उतरकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पार्षदों से चर्चा के बाद नगेंद्र सिंह राठौड़ के नाम पर सहमति बनी और इसके बाद उन्हें सभापति पद का प्रत्याशी बनाया गया। कांग्रेस को समर्थन की उम्मीद, बीजेपी बहुमत के भरोसे सभापति चुनाव में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत के आंकड़े की है। बीजेपी के पास 33 पार्षदों का समर्थन है, ऐसे में पार्टी अपनी स्थिति मजबूत मान रही है। वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और कुछ पार्षदों का समर्थन उसे मिल सकता है। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने कहा कि जनता ने ऐसा जनादेश दिया है जिसमें सभी को शहर के विकास के लिए काम करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी के कुछ पार्षद कांग्रेस के काम और विकास को देखते हुए समर्थन करते हैं तो कांग्रेस का सभापति उनके भरोसे पर खरा उतरेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो प्रत्याशी मैदान में है, वही नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाएगा। अब पार्षदों के रुख पर टिकी सभी की नजर सभापति चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। बीजेपी जहां बहुमत के आधार पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है, वहीं कांग्रेस समर्थन जुटाकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश में है। अब आने वाले दिनों में पार्षदों की भूमिका सबसे अहम होगी, क्योंकि सभापति चुनाव में हर वोट राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। नगर परिषद की कमान किसके हाथ में जाएगी, इसका फैसला चुनाव के दिन होगा, लेकिन नामांकन के साथ ही शहर की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।



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