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अंबिकापुर में बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा के सुसाइड मामले में पीजी कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए आरोपी छात्र नेता ज्ञान तिवारी का एडमिशन निरस्त कर दिया है। ज्ञान तिवारी ने पीजी कॉलेज में एमए के प्रथम सेमेस्टर में एडमिशन लिया था। मामले में एआईसीसी सदस्य आदितेश्वर शरण सिंहदेव ने सरगुजा आईजी को ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। ज्ञान तिवारी एनएसयूआई में यूनिवर्सिटी विंग का उपाध्यक्ष था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने उसकी कांग्रेस व एनएसयूआई की प्राथमिक सदस्यता निरस्त कर दी है। जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से एमसीबी जिले के चिरमिरी गोदरीपारा निवासी अंतरा शाह (19) अंबिकापुर के पीजी कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। 11 सितंबर की सुबह उसका शव बाथरूम में फांसी पर झूलता हुआ मिला था। अंतरा शाह की सहेलियों ने परिजनों को बताया कि छात्र नेता ज्ञान तिवारी उसे ब्लैकमेल करता था। उसके पास अंतरा के कुछ निजी चौट और वीडियो थे। इन्हें परिजनों को दिखाने की धमकी देकर वह छात्रा को लगातार परेशान कर रहा था। मामले में गांधीनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर छात्र नेता ज्ञान तिवारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे भेज दिया गया था। कॉलेज प्रबंधन ने की कार्रवाई मामले में पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डा. अनिल कुमार सिन्हा ने कार्रवाई करते हुए ज्ञान तिवारी का एडमिशन निरस्त कर दिया है। ज्ञान तिवारी ने एमए इतिहास के प्रथम सेमेस्टर में एडमिशन लिया था। प्रिंसिपल ने ज्ञान तिवारी का कॉलेज परिसर में भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। कांग्रेस ने कहा-निष्पक्ष जांच करें ज्ञान तिवारी को राजनैतिक संरक्षण होने का आरोप एबीवीपी ने लगाया था। एआईसीसी सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव ने सरगुजा आईजी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सिंहदेव ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति पद और पहुंच के बल पर ऐसी हरकत न करे, जिससे किसी महिला या छात्रा के सम्मान को ठेस पहुंचे।
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छात्रा के सुसाइड का मामला,आरोपी छात्र नेता का प्रवेश निरस्त:पीजी कॉलेज परिसर में प्रवेश पर भी रोक, एआईसीसी सदस्य ने की निष्पक्ष जांच की मांग
