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अब तो मेडिकल साइंस भी मानता है कि तन की बीमारी के पीछे मन का भी अदृश्य हाथ होता है। भले ही मेडिकल साइंस को मन पकड़ में नहीं आता, लेकिन उसके प्रभाव पकड़े जा सकते हैं, क्योंकि मन अंग नहीं, एक अवस्था है और उसे हमने ही निर्मित किया है। इस मामले में मन बहुत तेज-तर्रार है। तन उसके सामने कमजोर पड़ जाता है। मन अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए तन की बलि चढ़ा देता है। कभी-कभी तो हम समझते हैं कि हमें इस तन से ऐसा गलत काम नहीं करना चाहिए, फिर भी हम कर जाते हैं। बारीकी से सोचें तो पता लगेगा कि हमारे भीतर मन नाम का ऐसा तत्व है, जो हमसे ना चाहते हुए भी गलत काम करा जाता है। अध्यात्म कहता है कि यदि मन शून्य हो, नियंत्रित हो, तो शरीर में स्वास्थ्य उतर आएगा। इसलिए समय आ गया है कि मेंटल हेल्थ पर बहुत काम करें। फिजिकल हेल्थ उसी पर टिकी है। और मन को नियंत्रित करने के लिए 24 घंटे में से कुछ समय योग, उसमें भी खास तौर पर ध्यान को दिया जाए। तन स्वस्थ रखना हो तो मन पर राज करें और मन पर राज करना हो तो ध्यान किया जाए।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:मन नियंत्रित हो तो शरीर में भी स्वास्थ्य उतर आएगा
